बगैर तजुर्बे के सौंफ की खेती, मुनाफा अब भी दूर

– बागली क्षेत्र में मसाला खेती का बढ़ता क्रेज, लेकिन सही तकनीक की कमी से हो रहा नुकसान
बागली (हीरालाल गोस्वामी)। बागली और आसपास के इलाकों पुंजापुरा, बेहरी, चदुंपुरा, सोबलियापुरा, किशनगढ़, रतलाई में अब पारंपरिक फसलों के साथ मसाला खेती का रुझान बढ़ रहा है। खासतौर पर सौंफ की खेती कई किसानों के लिए नई संभावना लेकर आई है। हालांकि, सही तकनीकी जानकारी और उचित मार्गदर्शन की कमी के कारण कई किसान उत्पादन बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने में असफल हो रहे हैं।
बगैर किसी खास अनुभव के किसान सौंफ की खेती कर तो रहे हैं, लेकिन सही तकनीक और ज्ञान की कमी के कारण उनकी मेहनत का पूरा फल नहीं मिल रहा। अगर उचित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिले, तो यह फसल बागली क्षेत्र के किसानों के लिए फायदे का सौदा बन सकती है।
किसानों के सामने तीन मुख्य चुनौतियां है-
कम उपज: कई किसानों को यह नहीं पता कि कैसे उपयुक्त तकनीकों का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
खराब गुणवत्ता: सही देखभाल न करने के कारण सौंफ काली या भूरी पड़ जाती है, जिससे उसकी बाजार में मांग घट जाती है।
कम बाजार मूल्य: जब फसल की गुणवत्ता कमजोर होती है, तो उसका सही दाम नहीं मिल पाता। जहां अच्छी सौंफ 400 रुपए प्रति किलो तक बिकती है, वहीं कई किसानों को सिर्फ 60 रुपए किलो का ही भाव मिल पाता है।
किसान क्या कह रहे हैं-
सोबलियापुरा के सरपंच प्रतिनिधि लक्ष्मणसिंह परिहार का कहना है, कि किसानों में सौंफ की खेती को लेकर काफी उत्साह है, लेकिन वे भंडारण और प्रोसेसिंग सही तरीके से नहीं कर पाते, जिससे उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
गोपालपुर के किसान भेरूसिंह ने बताया कि उन्होंने पिछले साल एक बीघा में दो क्विंटल सौंफ का उत्पादन लिया था, लेकिन सही भाव नहीं मिलने से फायदा कम हुआ। इस बार उन्होंने नई तकनीकों का इस्तेमाल किया है और उम्मीद है कि चार बीघा में 10 क्विंटल तक उत्पादन होगा।
कृषि विशेषज्ञ की सलाह-
पूर्व कृषि विस्तार अधिकारी सुरेंद्रसिंह उदावत के अनुसार, सौंफ को मिश्रित फसल के रूप में चना और मसूर के साथ लगाया जाए तो उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकता है।
वहीं, कृषि वैज्ञानिक अशोक कुमार दीक्षित का कहना है कि सौंफ की खेती के लिए रेतीली मिट्टी उपयुक्त होती है, लेकिन अन्य प्रकार की मिट्टियों में भी इसे उगाया जा सकता है। बेहतर उत्पादन के लिए खेत की गहरी जुताई कर, उसमें गोबर की खाद मिलाकर समतलीकरण करना जरूरी है।
क्या है समाधान?
– किसानों को चाहिए कि वे सही समय पर सिंचाई और उर्वरक का प्रयोग करें।
– फसल को स्टोरेज के लिए उचित तरीके अपनाएं ताकि गुणवत्ता बनी रहे।
– कृषि वैज्ञानिकों और उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन लें।
– मिश्रित खेती अपनाकर उत्पादन और मुनाफा बढ़ाएं।




