बैर झगड़े का कारण है, निर्बेर होने पर ही विश्व में शांति आ सकती है- सद्गुरु मंगलनाम साहेब

देवास। एबी रोड स्थित श्री गुरुद्वारा साहिब में दीप प्रज्ज्वलित कर सद्गुरु मंगलनाम साहेब ने संसार में प्रेम, एकता व शांति का संदेश दिया। सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने गुरुवाणी में कहा कि जिस तरह से एक दीपक की लो अंधकार दूर कर देती है, वैसे ही एक सच्चा सद्गुरु मानव जीवन के अंधकार को दूर कर प्रकाशमान कर देता है।
हमें सदगुरु कबीर के मानव प्रेम, शांति संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। विश्व में बैर भाव का तालाब भरा हुआ है। सब अपनी-अपनी हांक रहे हैं। विश्व में शांति के लिए निर्बेर होना पड़ेगा। जब तक निर्बेर नहीं होंगे, तब तक विश्व में शांति नहीं आ सकती। जैसे श्वास गरीबी-अमीरी, जात-पात नहीं देखती, भेदभाव नहीं करती, वह निर्बेर होकर सभी में समान रूप से बह रही है। इसी प्रकार हमें निर्बेर होना पड़ेगा।
आगे कहा कि मानव अपने कर्मों से ही कलंकित होता है। कर्मों की गति न्यारी है। अपने कर्मों को सुधार लो। सद्कर्मों से ही जीवन में और विश्व में शांति आ सकती है। पद, प्रतिष्ठा के भ्रम में आदमी कपड़े बदल लेता है, चमड़े-कपड़े का व्यवहार कर लोगों को धोखा मत दो। साहब का संदेश प्रेम का संदेश है, शांति का संदेश है। निर्बेर हो जाओ। झगड़ा ही बैर का कारण है। यह जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।




