आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की मांग, विश्व आयुर्वेद परिषद ने सौंपा ज्ञापन
आयुर्वेद केवल चिकित्सा नहीं, जीवन जीने का विज्ञान- वैद्य प्रमोद जैन

देवास। आयुर्वेद को देश की राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की मांग को लेकर विश्व आयुर्वेद परिषद ने अभियान शुरू किया है।
इसी क्रम में देवास में परिषद के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कलेक्टर के प्रतिनिधि अपर कलेक्टर संजीव कुमार जैन को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का दर्जा देने की मांग की।
विश्व आयुर्वेद परिषद देवास के जिला संयोजक वैद्य प्रमोद कुमार जैन ने बताया कि भारतवर्ष में अनादि काल से प्रचलित चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद ही है और बाकि सभी चिकित्सा पद्धति का प्रादुर्भाव आयुर्वेद के बाद ही हुआ है। आयुर्वेद केवल चिकित्सा विज्ञान ही नही है अपितु जीवन का विज्ञान है। स्वस्थ जीवन जीने की कला भी है अतएव आयुर्वेद सनातन सिद्ध चिकित्सा पद्धति सहित जीवन का विज्ञान है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हमारे राष्ट्र में हमारा राष्ट्रीय ध्वज है, राष्ट्र गान है, राष्ट्र गीत है, हमारी राष्ट्रभाषा है, राष्ट्रीय पशु-पक्षी भी है, उसी प्रकार हमारी राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद ही होना चाहिए। इसके लिए अखिल भारतीय स्तर पर और प्रदेश स्तर पर सभी जिलों में जिलाधीश के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किए जा रहे हैं।
देवास जिले में भी विश्व आयुर्वेद परिषद मध्यप्रदेश के संयोजक वैद्य रामप्रताप राजपूत, अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार गुप्ता, महासचिव अनुराग सिंह राजपूत के निर्देश पर देवास विश्व आयुर्वेद परिषद के संयोजक प्रमोद जैन, अध्यक्ष सुभाषचंद भार्गव के नेतृत्व में ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर वैद्य आलोक जैन, राहुल मण्डलोई, प्रीतिबाला पाटीदार, नीरज गुप्ता, भूपेंद्र गोलावटिया, नीतेश पाटीदार आदि उपस्थित रहे।




