स्पोर्टसस्वास्थ्य

होलकर स्टेडियम में भारत-वेस्टइंडीज का रोमांच, अमलतास विशेष विद्यालय के बच्चों ने उठाया टी-20 का लुत्फ

दिव्यांग बच्चों ने स्टेडियम में लिया क्रिकेट का आनंद, खेल के जरिए आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता बढ़ाने की पहल

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देवास/इंदौर। क्रिकेट का रोमांच, दर्शकों का उत्साह और मैदान पर चौकों-छक्कों की गूंज के बीच अमलतास विशेष विद्यालय के बच्चों के लिए यादगार पल सामने आए।

इंदौर के होलकर स्टेडियम में आयोजित भारत और वेस्टइंडीज के टी-20 क्रिकेट मैच को देखने पहुंचे विशेष (दिव्यांग) बच्चों ने मैच का भरपूर आनंद लिया। स्टेडियम के उत्साहपूर्ण माहौल में बच्चों की खुशी और चेहरे पर आई मुस्कान ने इस आयोजन को खास बना दिया।

बच्चों के लिए यह केवल क्रिकेट मैच देखने का अवसर नहीं था, बल्कि खेल के बड़े मंच से जुड़ने, सामूहिक अनुभव साझा करने और नई यादें संजोने का भी मौका था। मैच के दौरान बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस पहल के जरिए उन्हें सामान्य सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिला।

खेल से जुड़ाव, आत्मविश्वास बढ़ाने की पहल-
अमलतास विशेष विद्यालय की इस पहल का उद्देश्य विशेष बच्चों को जीवन के विविध अनुभवों से जोड़ना और उन्हें सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर उपलब्ध कराना है। खेल ऐसे अवसर प्रदान करता है, जहां बच्चे दूसरों के साथ समय बिताते हैं, सामूहिक उत्साह का अनुभव करते हैं और नए वातावरण से परिचित होते हैं। होलकर स्टेडियम में मैच देखना भी बच्चों के लिए ऐसा ही यादगार अनुभव रहा।

प्रिंसिपल डॉ. भारती लाहोरिया ने बताया महत्व-
अमलतास विशेष विद्यालय की प्रिंसिपल डॉ. भारती लाहोरिया ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजनों में बच्चों की भागीदारी उनके सामाजिक और मानसिक विकास में सहायक हो सकती है। ऐसे अनुभवों से उनमें नई ऊर्जा, सामाजिक जुड़ाव और टीम भावना विकसित करने का अवसर मिलता है। बच्चों को इतने बड़े मंच पर मुस्कुराते और आनंद लेते देखना शिक्षकों और अभिभावकों के लिए गर्व का क्षण है।

विशेष बच्चों को हर अनुभव से जोड़ने का प्रयास-
अमलतास ग्रुप के चेयरमैन मयंकराज सिंह भदौरिया ने कहा कि संस्थान का प्रयास है कि विशेष बच्चों को जीवन के विभिन्न अनुभवों और अवसरों से जोड़ा जाए। होलकर स्टेडियम में क्रिकेट मैच देखने का अवसर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने और मुख्यधारा की गतिविधियों में सहभागिता के लिए महत्वपूर्ण कदम है। बच्चों के चेहरों पर दिखी खुशी और उत्साह ही इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने भविष्य में भी बच्चों को ऐसे अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास जारी रखने की बात कही।

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