नेशनल लोक अदालत में सैकड़ों मामलों का समाधान: कई टूटते परिवार फिर हुए एक, करोड़ों के विवाद सुलझे

देवास में 34 खंडपीठों ने किया रिकॉर्ड निराकरण, कुटुंब न्यायालय की संवेदनशील पहल से कई रिश्तों में लौटी मुस्कान
नेशनल लोक अदालत में निराकरण पर समय एवं धन की होती है बचत- प्रधान जिला न्यायाधीश अजय प्रकाश मिश्र
देवास। आयोजित वर्ष 2026 की द्वितीय नेशनल लोक अदालत सिर्फ मामलों के निराकरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई बिखरते परिवारों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई। जिलेभर में 607 लंबित और 271 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण करते हुए करोड़ों रुपए के अवार्ड पारित किए गए। खास बात यह रही कि कुटुंब न्यायालय में 30 जोड़े फिर से साथ रहने को तैयार हुए। कहीं तलाक की कगार पर पहुंचा रिश्ता बच्चों की खातिर जुड़ गया, तो कहीं 14 साल पुरानी कड़वाहट प्यार और समझाइश के आगे खत्म हो गई।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवास अजय प्रकाश मिश्र के मार्गदर्शन में शनिवार को जिले के समस्त न्यायालयों में वृहद स्तर पर इस वर्ष की द्वितीय ’नेशनल लोक अदालत’ का आयोजन किया गया। श्री मिश्र प्रधान जिला न्यायाधीश ने दीप प्रज्जवलित कर नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नेशनल लोक अदालत प्रकरणों के निराकरण का सरल सुलभ माध्यम है। इसमें समय एवं धन की बचत होती है। उन्होंने न्यायिक अधिकारीगण और अधिवक्तागण को अधिक से अधिक प्रकरणों में राजीनामा कराने के लिए प्रेरित किया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवास के तत्वावधान में आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में परिवार न्यायालय, देवास ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। परिवार न्यायालय के न्यायाधीश जितेन्द्र कुशवाह ने एकल बैठक में कुल 80 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया। लोक अदालत से 30 जोड़े साथ में घर गए। यह संख्या परिवार न्यायालय, देवास के इतिहास में किसी एक लोक अदालत में निराकृत प्रकरणों की सर्वाधिक संख्या है।

उल्लेखनीय है कि पारिवारिक विवादों का निराकरण अत्यंत संवेदनशील एवं जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें पक्षकारों के मध्य सहमति बनाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। ऐसे में एक ही दिन में 80 परिवारों को न्याय एवं राहत प्रदान किया जाना न केवल श्री कुशवाह की न्यायिक कुशलता एवं अथक परिश्रम का परिचायक है, अपितु उन सभी परिवारों के लिए भी एक नई शुरुआत है जो लंबे समय से विवाद की स्थिति में थे।
नेशनल लोक अदालत में सिविल, आपराधिक, विद्युत अधिनियम, एनआईएक्ट, चैक बाउन्स, श्रम मामले, मोटर दुर्घटना दावा, बीएसएनएल आदि विषयक प्रकरणों के निराकरण हेतु जिला मुख्यालय देवास एवं तहसील स्तर पर सोनकच्छ, कन्नौद, खातेगांव, टोंकखुर्द एवं बागली में 34 न्यायिक खंडपीठों का गठन किया गया।
प्रधान जिला न्यायाधीश अजय प्रकाश मिश्र ने विद्युत कंपनी, नगर निगम, बैंक, बीएसएनएल, बीमा कंपनी के स्टाॅल पर जाकर तथा खंडपीठों का भ्रमण कर समस्त संबंधित अधिकारीगण को लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में प्रकरण के निराकरण हेतु प्रेरित किया।
राजीनामा करने वाले पक्षकारगण को स्मृति स्वरूप फलदार और फूलों के पौधे भेंट किए गए एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रेरित किया।
शुभारंभ कार्यक्रम में विकास शर्मा विशेष न्यायाधीश, जितेन्द्र सिंह कुशवाह प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, उमाशंकर अग्रवाल प्रथम जिला न्यायाधीश, अभिषेक गौड़ पंचम जिला न्यायाधीश, प्रसन्न सिंह बहरावत चतुर्थ जिला न्यायाधीश, डाॅ. रविकांत सोलंकी अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, भारतसिंह कनेल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रोहित श्रीवास्तव सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अन्य न्यायाधीशगण साक्षी कपूर, पूर्णिमा कोठे राजन, नीलेन्द्र कुमार तिवारी, दीक्षा मौर्य, कुंवर युवराज सिंह, अभिजीत सिंह, किरण सिंह, नेहा उपाध्याय, रश्मि अभिजीत मरावी, मोनिता वानखेड़े, चंद्रा पवार, मुस्कान अरोरा, सुभाष चैधरी जिला विधिक सहायता अधिकारी, अशोक वर्मा, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ, अतुल पंड्या सचिव अधिवक्ता संघ, आरती खेडेकर, उपायुक्त नगर निगम, विद्युत कंपनी एवं बैंक के अधिकारीगण, लीगल एड डिफेंस काउंसेल स्टाॅफ, लोक अभियोजन अधिकारीगण, अधिवक्तागण, पैरालीगल वालेंटियर्स एवं पक्षकारगण उपस्थित रहे।
निराकृत प्रकरणों की जानकारी-
देवास जिले में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 607 लंबित प्रकरणों का निराकरण हुआ है। संपूर्ण जिले में गठित 34 न्यायिक खंडपीठों में न्यायालयों के लंबित प्रकरणों में आपराधिक प्रकरण 172, मोटर दुुर्घटना के 11, चैक बाउन्स 87, फैमेली मेटर्स 68, विद्युत के 139, श्रम के 08, विविध के 103, सिविल के 19, कुल 607 प्रकरण निराकृत हुए जिसमें राशि 4 करोड़ 19 लाख 64 हजार 592 रुपए के अवार्ड की गई। निराकृत 11 क्लेम प्रकरणों में राशि 70 लाख 5 हजार रुपए के अवार्ड आपसी समझौते के आधार पर पारित किए गए।
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नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के 87 प्रकरण निराकृत हुए जिनमें 1 करोड़ 64 लाख 43 हजार 845 रुपए के चैकों की राशि में सेटलमेंट किया गया। 55 लाख 35 हजार 150 रुपए की राशि के 19 सिविल प्रकरणों का निराकरण हुआ।271 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया है, जिसमें 48 लाख 26 हजार 284 राशि के अवार्ड पारित किए गए है।
सफलता की कहानी-1
लोक अदालत ने फिर बसाया घर: दहेज विवाद और तलाक की धमकी के बीच दो बच्चों को मिला मां-बाप का साथ-
देवास की नेशनल लोक अदालत में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब वर्षों से टूटन और तनाव झेल रहा एक परिवार फिर से एक हो गया। फरीदा बी (परिवर्तित नाम) और सलमान खान (परिवर्तित नाम) के बीच चल रहा विवाद आखिरकार प्यार, समझाइश और बच्चों के भविष्य के आगे खत्म हो गया।
दोनों का निकाह वर्ष 2019 में हुआ था। शुरुआती दिनों के बाद ही दहेज में रुपए, प्लॉट और गाड़ी की मांग को लेकर रिश्ते में खटास आने लगी। बात-बात पर विवाद बढ़ते गए और हालात इतने बिगड़े कि तलाक की धमकी, मारपीट और अलगाव तक स्थिति पहुंच गई। मजबूर होकर पत्नी अपने दो छोटे बच्चों के साथ अलग रहने लगी और मामला न्यायालय तक पहुंच गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह कुशवाह ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर करीब एक घंटे तक काउंसलिंग की। उन्होंने पति-पत्नी को बच्चों के भविष्य, परिवार की अहमियत और रिश्तों की गरिमा का एहसास कराया। समझाइश का असर ऐसा हुआ कि दोनों की आंखें नम हो गईं और वे फिर साथ रहने को तैयार हो गए।
पत्नी ने खुशी-खुशी अपना प्रकरण वापस ले लिया। न्यायालय परिसर में ही दोनों ने एक-दूसरे को पुष्पहार पहनाकर पुराने शिकवे मिटाए। इस भावुक पल का गवाह बना पूरा न्यायालय परिसर तालियों से गूंज उठा। न्यायालय ने उन्हें नए जीवन की शुरुआत के प्रतीक स्वरूप पौधे भेंट किए। दो मासूम बच्चों को आखिरकार फिर से मां-बाप का साया मिल गया।
सफलता की कहानी-2
14 साल की कड़वाहट खत्म: लोक अदालत में फिर साथ आया बिखरता परिवार-
नेशनल लोक अदालत में एक और ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी की आंखें नम कर दीं। 15 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते में आई दरार आखिरकार प्रेम और समझाइश के सहारे भर गई।
देवेन्द्र (परिवर्तित नाम) और महिमा (परिवर्तित नाम) ने 15 वर्ष पहले हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। लेकिन शादी के महज दो माह बाद ही वैचारिक मतभेद, संवाद की कमी और आपसी तनाव ने रिश्ते को कमजोर कर दिया। धीरे-धीरे हालात इतने बिगड़े कि दोनों अलग रहने लगे और आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए न्यायालय पहुंच गए।
भरण-पोषण और दहेज सामग्री का लेन-देन भी पूरा हो चुका था। ऐसा लग रहा था कि अब रिश्ता खत्म होना तय है। लेकिन नेशनल लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह कुशवाह ने दोनों को एक बार फिर सोचने का अवसर दिया।
करीब एक घंटे तक चली समझाइश में उन्हें उनकी दो संतानों के भविष्य, परिवार की अहमियत और साथ बिताए वर्षों की याद दिलाई गई। बातचीत के दौरान दोनों का मन बदला और आखिरकार उन्होंने तलाक का प्रकरण वापस लेने का फैसला कर लिया।
न्यायालय परिसर में ही दोनों ने एक-दूसरे को पुष्पहार पहनाए और नई शुरुआत का संकल्प लिया। न्यायालय द्वारा उन्हें पौधे भेंट किए गए, ताकि वे अपने रिश्ते को भी उसी तरह प्यार और विश्वास से सींच सकें। वर्षों से तनाव में जी रहे परिवार के चेहरों पर आखिरकार मुस्कान लौट आई।



