चैत्र नवरात्रि 2026: मंत्र जाप, राशि अनुसार उपाय, पाएं सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा

देवास। देवी शक्ति की आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो रहा है, जो हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 के आगमन का भी शुभ संकेत है। इस बार नवरात्रि की शुरुआत एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग के साथ हो रही है, जब सूर्योदय के समय अमावस्या का प्रभाव और खरमास का संयोग एक साथ रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पं. संदीप शास्त्री के अनुसार लगभग 72 वर्षों बाद बन रहा यह योग देवी साधना, मंत्र जाप और आध्यात्मिक ऊर्जा के संचय के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि और शक्ति की कामना करेंगे।
घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त-
नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है।
विशेष ध्यान दें: इस वर्ष नवरात्रि के प्रथम दिन (19 मार्च) सूर्योदय के समय अमावस्या का प्रभाव रहेगा और साथ ही ‘खरमास’ भी चल रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, करीब 72 वर्षों के बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है। यद्यपि देवी पूजन और साधना के लिए यह समय अत्यंत शुभ है, परंतु खरमास के कारण विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य 14 अप्रैल तक वर्जित रहेंगे।
9 दिनों की पूजन सारणी और शुभ रंग
19 मार्च मां शैलपुत्री (घटस्थापना) प्रथम पीला
20 मार्च मां ब्रह्मचारिणी द्वितीय हरा
21 मार्च मां चंद्रघंटा तृतीय स्लेटी (Grey)
22 मार्च मां कूष्मांडा चतुर्थ नारंगी
23 मार्च मां स्कंदमाता पंचम सफेद
24 मार्च मां कात्यायनी षष्ठी लाल
25 मार्च मां कालरात्रि सप्तमी रॉयल ब्लू
26 मार्च मां महागौरी (अष्टमी) अष्टमी गुलाबी
27 मार्च मां सिद्धिदात्री (राम नवमी) नवमी बैंगनी
अष्टमी, नवमी और राम नवमी-
महाअष्टमी (26 मार्च): इस दिन कुलदेवी का पूजन और कन्या पूजन का विशेष फल मिलता है।
राम नवमी (27 मार्च): मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसी दिन चैत्र नवरात्रि का समापन होगा।
व्रत पारण: जो भक्त पूरे नौ दिन का व्रत रखते हैं, वे 28 मार्च को प्रातः शुभ समय में पारण कर सकते हैं।
पं. संदीप शास्त्री ने बताया, कि नवरात्रि के दौरान ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का जाप और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। सात्विक आहार और संयमित जीवन अपनाकर मां की आराधना करें।
विशेष: राशि अनुसार महामंत्र और उपाय पं. संदीप शास्त्री के अनुसार नवरात्रि के पावन दिनों में यदि अपनी राशि के अनुसार मंत्र जाप किया जाए, तो विशेष फल की प्राप्ति होती है:
मेष और वृश्चिक: “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः” (लाल चंदन की माला से जाप करें)।
वृषभ और तुला: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्धलक्ष्म्यै नमः” (सफेद फूल अर्पित करें)।
मिथुन और कन्या: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” (कपूर की आरती करें)।
कर्क: “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौं:” (मिश्री का भोग लगाएं)।
सिंह: “ॐ ह्रीं श्रीं सौं:” (लाल पुष्प और गुड़ का नैवेद्य)।
धनु और मीन: “ॐ ऐं क्लीं सौं:” (पीले वस्त्र पहनकर पूजन करें)।
मकर और कुंभ: “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं” (तिल का तेल अर्पित करें)।
पूजा-पाठ और साधना-
खरमास में आध्यात्मिक कार्यों पर कोई रोक नहीं होती, बल्कि इस दौरान की गई पूजा का फल और अधिक मिलता है।
देवी साधना: नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा, कलश स्थापना और अखंड ज्योति जलाना पूरी तरह शास्त्रसम्मत है। आप दुर्गा सप्तशती का पाठ और मंत्र जाप सामान्य रूप से कर सकते हैं।
दान-पुण्य: खरमास और नवरात्रि दोनों ही समय में दान का विशेष महत्व है। गरीबों को अन्न, वस्त्र या सामर्थ्य अनुसार सहायता जरूर करें।
नित्य कर्म: नियमित रूप से की जाने वाली आरती, भोग और प्रार्थना जारी रखें।
सूर्य उपासना: खरमास सूर्य देव से संबंधित है, इसलिए प्रतिदिन सूर्य को जल देना और ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करना बहुत शुभ रहेगा।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
खरमास के दौरान “काम्य कर्म” यानी सांसारिक सुखों से जुड़े बड़े मांगलिक कार्यों की मनाही होती है।
विवाह और सगाई: इस दौरान शादी-ब्याह जैसे संस्कार नहीं किए जाते।
गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश या नींव रखना (भूमि पूजन) इस समय वर्जित माना गया है।
मुंडन और जनेऊ: बच्चों का मुंडन या उपनयन संस्कार खरमास समाप्त होने तक टाल देना चाहिए।
नई संपत्ति का निवेश: यदि बहुत अनिवार्य न हो, तो नई जमीन या बड़ा वाहन खरीदने से बचना चाहिए। हालांकि, नवरात्रि होने के कारण कुछ लोग खरीदारी करते हैं, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से खरमास का ध्यान रखना बेहतर है।
चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शक्ति की आराधना के साथ-साथ जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिषचार्य पं. संदीप शास्त्री के अनुसार, इन नौ दिनों में किए गए विशेष उपाय शीघ्र फलदायी होते हैं।
यहाँ विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी उपाय दिए गए हैं:
कर्ज निवारण और धन प्राप्ति (माता लक्ष्मी का आशीर्वाद)
उपाय: नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन ‘कनकधारा स्तोत्र’ का पाठ करें।
विशेष: अष्टमी या नवमी के दिन लाल कपड़े में 5 कौड़ियां और एक चांदी का सिक्का बांधकर तिजोरी में रखें। इससे रुका हुआ धन वापस आने के योग बनते हैं और अनावश्यक खर्चे कम होते हैं।
शीघ्र विवाह के लिए (माता कात्यायनी की पूजा) उपाय: जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा है, उन्हें नवरात्रि में प्रतिदिन माता कात्यायनी के इस मंत्र का जाप करना चाहिए: कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी पतिं मे कुरु ते नमः॥
विशेष: विवाह योग्य युवक-युवती को माता रानी को हल्दी की गांठें और पीले फूल अर्पित करने चाहिए।
गृह कलेश निवारण (सुख-शांति हेतु)
उपाय: घर में सुख-शांति के लिए कपूर में दो लौंग डालकर जलाएं और उसका धुआं पूरे घर में दिखाएं।
विशेष: नवरात्रि के नौ दिन दुर्गा सप्तशती के ‘अर्गला स्तोत्र’ का पाठ करने से परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
व्यापार वृद्धि और उच्च पद प्राप्ति (सफलता के लिए) उपाय: अपने कार्यस्थल पर या घर के मंदिर में सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।
विशेष: दशमी के दिन किसी कन्या को नारियल और कुछ दक्षिणा भेंट करें। व्यापार में उन्नति के लिए कार्यस्थल के मुख्य द्वार पर सिंदूर से ‘स्वास्तिक’ बनाएं।
बेहतर स्वास्थ्य के लिए (आरोग्य प्राप्ति) उपाय: यदि कोई लंबे समय से बीमार है, तो मां दुर्गा को लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
विशेष: प्रतिदिन ‘रोगानशेषानपहंसि तुष्टा…’ मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे मानसिक तनाव दूर होता है और शारीरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
महत्वपूर्ण सुझाव: इन सभी उपायों को पूरी श्रद्धा और सात्विकता के साथ करना अनिवार्य है। नवरात्रि के दौरान दीप प्रज्वलन और दुर्गा चालीसा का नियमित पाठ इन उपायों की शक्ति को और बढ़ा देता है।




