धर्म-अध्यात्म

सवा करोड़ राम नाम जपने से मन होता है शांत- नागर भाईजी

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देवास। ग्राम फतनपुर में आयोजित एकदिवसीय अमृतवाणी सत्संग में श्री राम शरणम् आश्रम, देवास के इंद्र सिंह नागर भाईजी ने राम नाम की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव स्वयं निरंतर राम नाम का जाप करते हैं और श्री हनुमान जी भी सदैव राम का सिमरन करते हैं। राम नाम का जप ही भगवान से मिलन का सरल और प्रभावी मार्ग है।

नागर भाईजी ने कहा कि जब समान विचारधारा और एक भाव से जुड़े लोग एक स्थान पर एकत्र होकर सामूहिक रूप से प्रभु का स्मरण करते हैं, तो भाव तरंगें उत्पन्न होती हैं और उनकी प्रार्थना अवश्य सुनी जाती है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों और सत्संग का सार यही है कि भगवान के नाम में हमारी रुचि जागृत हो। शास्त्रों के अनुसार सवा करोड़ राम नाम जपने से मन कितना भी अशांत क्यों न हो, शांत हो जाता है, और 13 करोड़ राम नाम जप से व्यक्ति का कायाकल्प हो जाता है।
उन्होंने स्वामी सत्यानंद जी महाराज के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सत्संग में शोर-शराबे के स्थान पर अनुशासन, संयम और शांत भाव को महत्व दिया। साथ ही भगवान राम के प्रति श्रद्धा और विश्वास जागृत करने हेतु “अमृतवाणी” नामक लघु ग्रंथ प्रदान किया, जिसका पाठ लगभग 45 मिनट में भक्तिभाव से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कलयुग में हरि नाम के सिमरन से ही आत्मकल्याण संभव है।

राष्ट्र चिंतन पर बल देते हुए नागर भाईजी ने युवाओं से आह्वान किया कि जैसे वे राम और कृष्ण की भक्ति करते हैं, वैसे ही राष्ट्र सेवा के लिए भी सदैव तत्पर रहें। उन्होंने कहा कि राष्ट्र है तो सब कुछ है, यदि राष्ट्र नहीं रहेगा तो कुछ भी शेष नहीं रहेगा।

कार्यक्रम के अंत में आरती के पश्चात ग्राम फतनपुर की साधक समिति ने आभार व्यक्त किया। यह जानकारी श्री राम शरणम् के प्रादेशिक प्रचार प्रमुख डॉ. सुरेश गुर्जर द्वारा प्रसारित की गई।

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