शनिश्चरी सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर नेमावर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, सवा लाख भक्तों ने लगाई नर्मदा में डुबकी
सिद्धनाथ घाट पर हुआ पितरों का तर्पण और पूजन, भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी

नेमावर (संतोष शर्मा)। शनिश्चरी सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर भगवान परशुराम की कर्मभूमि नेमावर में मां नर्मदा के पवित्र तट पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पर्व के अवसर पर शुक्रवार शाम से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।
सिद्धनाथ घाट और नागर घाट पर रातभर पूजा-अर्चना, अखंड दीप प्रज्वलन और पितरों के निमित्त जल तर्पण का क्रम चलता रहा। शनिवार को सुबह से शाम तक मुख्य घाटों सहित अन्य घाटों पर करीब सवा लाख श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में पुण्य स्नान किया।
पितरों की शांति और मोक्ष की कामना से किया तर्पण-
विगत छह वर्षों बाद शनिवार के विशेष संयोग में आई शनिश्चरी सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। शुक्रवार शाम से पहुंचे भक्तों ने नर्मदा तट पर रात्रि विश्राम किया और पितरों की आत्मशांति एवं मोक्ष की कामना से रात्रि जागरण किया। श्रद्धालुओं ने अखंड दीप ज्योति प्रज्वलित कर पितरों का पूजन-अर्चन किया और मां नर्मदा के पवित्र जल से तर्पण किया। इसके साथ ही परिवार की आरोग्यता, सुख-शांति, धन-समृद्धि और वंश वृद्धि की मंगल कामना की।
शनिवार सुबह श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में स्नान के बाद भगवान सिद्धनाथ के दर्शन किए। भक्तों ने भगवान सिद्धनाथ की भस्म आरती और पुष्प श्रृंगार के दर्शन कर जलाभिषेक किया तथा सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद मंदिर परिसर में विराजित ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा भेंट कर आशीर्वाद लिया।
शनि शांति के लिए किया दान-पुण्य
शनिश्चरी अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान शनि की पूजा-अर्चना कर शनि शांति के निमित्त सप्तधान्य, तिल, तेल, लौह वस्तुएं, छाता और काले वस्त्रों का दान किया। जरूरतमंदों को वस्त्र, जूते-चप्पल और अन्न भी वितरित किया गया। नर्मदा तट पर सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। अनेक भक्त शारदीय नवरात्रि में घट स्थापना और पूजा-अर्चना के लिए मां नर्मदा का पवित्र जल भी अपने साथ लेकर गए।
12 वर्षों से चल रहा भंडारा
क्षेत्रीय विधायक आशीष शर्मा के सानिध्य में करीब 12 वर्षों से संचालित भंडारा इस बार भी निरंतर चलता रहा। सुबह से शाम तक हजारों श्रद्धालुओं ने भंडारे में भोजन प्रसादी ग्रहण की। भंडारे के दौरान भोजन वितरण के साथ परिसर की स्वच्छता पर भी ध्यान दिया गया। आयोजकों और सेवाभाव से जुड़े लोगों ने श्रद्धालुओं को प्रसादी उपलब्ध कराने में सहयोग किया।

भंडारे के दौरान विधायक आशीष शर्मा की एक अलग भूमिका भी देखने को मिली। वे भोजन की पत्तल में बचा हुआ भोजन सड़क पर फेंके जाने पर वे स्वयं उसे उठाकर कूड़ेदान में डालने चले जाते हैं। उनके इस व्यवहार को सेवा और स्वच्छता के प्रति सजगता के रूप में देखा जा रहा है।
500 पुलिसकर्मियों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था
मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस, नगर परिषद और प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं की गई थीं। एडिशनल एसपी सौम्या जैन, एसडीओपी आदित्य तिवारी और नेमावर थाना प्रभारी टीना शुक्ला के नेतृत्व में विभिन्न थानों से आए करीब 500 पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली। नगर परिषद के सफाईकर्मियों ने भी मेला परिसर को स्वच्छ रखने में योगदान दिया।

नगर परिषद सीएमओ आनंदीलाल वर्मा, अध्यक्ष कृष्ण गोपाल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजपाल तोमर तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की भी व्यवस्थाओं में भूमिका रही। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद मेला आयोजन कुल मिलाकर व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
मुख्य मार्ग पर दुकानों से हुई परेशानी
व्यवस्थाओं के बीच कुछ स्थानों पर अव्यवस्था भी सामने आई। बस स्टैंड से सिद्धनाथ महादेव मंदिर और नर्मदा घाट की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर दुकानें नहीं हटाए जाने से श्रद्धालुओं को भारी भीड़ के बीच से निकलना पड़ा। स्थानीय स्तर पर इस मार्ग पर लगभग छह फीट जगह ही उपलब्ध रहने की बात कही गई। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मार्ग को 15 से 20 फीट तक खुला रखने की जरूरत बताई गई, ताकि लोगों को घाट तक पहुंचने में परेशानी न हो।
विशेषकर महिलाओं को भीड़ के बीच आवागमन में असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। ऐसे में भविष्य में बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान मुख्य मार्ग से अतिक्रमण और अस्थायी दुकानों को व्यवस्थित करने की आवश्यकता महसूस की गई, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम हो सके।
स्थानीय किसानों और नागरिकों को भी परेशानी
मेले के दौरान वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए की गई नाकेबंदी से स्थानीय नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। खेती-किसानी और अन्य काम निपटाकर घर लौटने वाले किसानों, व्यापारियों को कई स्थानों पर रोक दिए जाने से परेशानी हुई।
अक्टूबर में खेती-किसानी के कामकाज की व्यस्तता के चलते किसान सुबह जल्दी खेतों में जाते हैं और काम पूरा होने के बाद वापस लौटते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों के आवागमन के लिए उचित व्यवस्था नहीं होने से उन्हें अनावश्यक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय स्तर पर मांग उठी कि बड़े पर्वों के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखते हुए स्थानीय निवासियों के लिए भी सुगम आवागमन का विकल्प रखा जाए।
शारदीय नवरात्रि की तैयारी के लिए भी ले गए नर्मदा जल- शनिश्चरी सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर नेमावर के विभिन्न घाटों पर दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। करीब सवा लाख भक्तों के नर्मदा स्नान करने का अनुमान बताया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु नर्मदा जल को पवित्र मानकर शारदीय नवरात्रि में घट स्थापना और मां जगदम्बा की पूजा-अर्चना के लिए अपने घर ले गए। रविवार से आरंभ होने वाले शारदीय नवरात्रि पर्व को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया।




