देवास की माता टेकरी की दान पेटियों में डॉलर और विदेशी मुद्रा भी, 39.58 लाख रुपए का चढ़ावा; चिट्ठियों में छलकी भक्तों की आस्था
किसी ने बेटे की आंखों की रोशनी लौटाने की मांगी मन्नत, तो किसी ने बेटियों की सुरक्षा के लिए कठोर कानून बनाने की लिखी बात

नौकरी, विवाह और परिवार की खुशहाली की कामनाओं के बीच निजी क्षेत्र में सात घंटे की ड्यूटी की मांग भी पहुंची माता के दरबार
देवास। मध्य प्रदेश के देवास स्थित प्रसिद्ध माता टेकरी पर मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी के दरबार में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ मन की बात भी अर्पित करते हैं। कोई मन्नत पूरी होने पर शीश नवाता है, तो कोई जीवन की परेशानियों से मुक्ति की उम्मीद लेकर माता के चरणों में प्रार्थना-पत्र रख जाता है।
नवरात्रि के बाद शुक्रवार को दोनों मंदिरों की 21 दान पेटियां खोली गईं तो उनमें करीब 39 लाख 58 हजार 451 रुपए का कुल दान सामने आया। नकदी और चांदी के आभूषणों के साथ डॉलर, नेपाली रुपया और वियतनाम की मुद्रा जैसी विदेशी करेंसी भी मिली।

लेकिन दान पेटियों में रखी चिट्ठियों ने इस पूरी प्रक्रिया को एक अलग ही भावनात्मक पहलू दे दिया। इन चिट्ठियों में किसी मां की अपने बेटे की आंखों की रोशनी लौटने की गुहार थी, तो किसी परिवार की खुशहाली की कामना। किसी ने रोजगार और विवाह की मन्नत मांगी, तो किसी ने बेटियों की सुरक्षा और सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए अपनी बात माता के सामने रखी।
39 लाख रुपए से अधिक का दान-
नवरात्रि के बाद शुक्रवार को माता टेकरी स्थित मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी मंदिर की कुल 21 दान पेटियां खोली गईं। इनमें प्राप्त राशि की गणना सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई और देर शाम तक चलती रही। गणना के दौरान नकदी के साथ चांदी के आभूषण, भारतीय मुद्रा के अलावा दूसरे देशों की करेंसी भी आई।
उपलब्ध गणना के अनुसार, दान पेटियों से करीब 34 लाख 29 हजार 865 रुपए नकद प्राप्त हुए। ऑनलाइन माध्यम से लगभग 4 लाख 30 हजार 786 रुपए का दान मिला, जबकि रसीद के माध्यम से 97 हजार 800 रुपए प्राप्त हुए। इस तरह कुल दान राशि 39 लाख 58 हजार 451 रुपए रही। दान में डॉलर, नेपाली रुपया और वियतनाम की मुद्रा आदि विदेशी करेंसी भी शामिल है। विदेशी मुद्रा का मिलना इस बात की ओर ध्यान खींचता है कि माता टेकरी में श्रद्धालुओं की आस्था केवल स्थानीय क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
दान पेटियों में मिलीं चिट्ठियां-
दान पेटियों से निकली चिट्ठियों में लोगों की निजी जिंदगी से जुड़ी परेशानियां और उम्मीदें दर्ज थीं। इन प्रार्थना-पत्रों में बड़े धार्मिक आयोजनों की भीड़ से अलग आम लोगों के जीवन की वे चुनौतियां दिखाई दीं, जिनका सामना वे रोजाना करते हैं।

एक श्रद्धालु ने निजी क्षेत्र में काम करने की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए ड्यूटी का समय सात घंटे करने की प्रार्थना की। चिट्ठी में लंबे कामकाजी घंटों और कम वेतन से जुड़ी परेशानी व्यक्त की गई थी। इस प्रार्थना में बेहतर कार्य-जीवन संतुलन की इच्छा दिखाई देती है। रोजी-रोटी के लिए काम करने वाले लोगों के लिए परिवार को समय दे पाना और अपनी निजी जिंदगी के लिए वक्त निकालना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
एक अन्य चिट्ठी में मां ने अपने बेटे की आंखों की रोशनी वापस लौटने की कामना की। किसी श्रद्धालु ने बेटे की परीक्षा में सफलता के लिए प्रार्थना की, तो किसी ने शीघ्र विवाह की मन्नत मांगी। एक में पति की नौकरी और परिवार में संतान सुख की कामना करते हुए अपनी अर्जी माता के दरबार में रखी। इन चिट्ठियों में दर्ज कामनाएं अलग-अलग थीं, लेकिन इनके पीछे अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद एक जैसी नजर आई।
बेटियों की सुरक्षा से लेकर सड़क दुर्घटनाओं तक की चिंता-
दान पेटियों से मिली चिट्ठियों में व्यक्तिगत परेशानियों के साथ सामाजिक मुद्दों को लेकर भी चिंता जाहिर की गई थी। एक श्रद्धालु ने बेटियों की सुरक्षा के लिए कठोर कानून बनाने की मांग लिखी। वहीं, लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर चिंतित एक भक्त ने माता रानी से सभी की रक्षा करने की प्रार्थना की।
इन प्रार्थना-पत्रों में लोगों ने उन विषयों को भी जगह दी, जो उनके लिए निजी आस्था से आगे बढ़कर समाज की चिंता का हिस्सा हैं। धार्मिक स्थलों पर चिट्ठियों के माध्यम से अपनी बात रखने की परंपरा में भक्त अपनी इच्छाएं, परेशानियां और उम्मीदें व्यक्त करते हैं। माता टेकरी की दान पेटियों से सामने आईं ये चिट्ठियां भी इसी भावनात्मक जुड़ाव की झलक दिखाती हैं।
17 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन-
नवरात्रि के दौरान देवास की माता टेकरी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। इस अवधि में 17 लाख से अधिक भक्तों ने मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी के दर्शन किए। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार दान भी अर्पित किया।
माता टेकरी देवास की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि के दौरान यहां स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा दूसरे शहरों और राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन, मन्नत और पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं का भावनात्मक जुड़ाव भी इस धार्मिक स्थल की विशेष पहचान है। दान पेटियों से मिली विदेशी करेंसी इस आस्था के व्यापक दायरे की ओर संकेत करती है।
62 कर्मचारियों ने की दान राशि की गणना-
शुक्रवार को दान पेटियां खोलने और राशि की गणना की प्रक्रिया नायब तहसीलदार कपिल गुर्जर और हरिओम ठाकुर की उपस्थिति में संपन्न हुई। मां चामुंडा देवस्थान प्रबंधन समिति की ओर से यह प्रक्रिया कराई गई। गणना के काम में 62 कर्मचारी जुटे रहे।
सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई गणना देर शाम तक जारी रही। दान पेटियों से प्राप्त नकदी के अलावा चांदी के आभूषण और विभिन्न देशों की मुद्रा को भी गणना के दौरान सामने आए चढ़ावे में शामिल किया गया।
माता टेकरी पर नवरात्रि के दौरान उमड़ी श्रद्धा का एक पहलू दान की राशि में दिखाई दिया, तो दूसरा उन चिट्ठियों में, जिनमें लोगों ने अपने जीवन की सबसे निजी चिंताएं और उम्मीदें लिखीं। किसी के लिए माता का दरबार परिवार की खुशहाली की कामना का स्थान बना, तो किसी ने स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे सवालों के साथ अपनी प्रार्थना अर्पित की। दान पेटियों से निकली ये चिट्ठियां बताती हैं कि श्रद्धालुओं के लिए माता का दरबार केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि अपने मन की बात कहने और उम्मीद का सहारा तलाशने की जगह भी है।



