कर्मचारी का रिटायरमेंट एक सरकारी प्रक्रिया है, लेकिन समाजसेवा और देश सेवा करने का बेहतर अवसर – श्री व्यास

चार दशक से अधिक सेवाकाल पूर्ण होने पर बुनकर को दी विदाई
देवास। रिटायरमेंट कर्मचारी के सेवाकाल का एक महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसमें नौकरी समाप्त होकर जीवन की नई शुरुआत की जाती है। सेवानिवृत्त कर्मचारी सही योजना बनाकर बाक़ी ज़िंदगी को सुखमय, सुरक्षित और आरामदायक बनाना चाहे तो उसे सबसे पहले अच्छी प्लानिंग कर लेना चाहिए। कर्मचारी रिटायर जरूर हो जाता है लेकिन उसे समाज और देशसेवा करने का बेहतर अवसर मिल जाता है।
यह बात अपने मुख्य आतिथ्य उद्बोधन में सरकारी स्कूल बीराखेड़ी में पूर्व सहायक संचालक शिक्षा अधिकारी गेरूलाल व्यास ने कही। श्री व्यास ने कहा कि शिक्षक अशोक बुनकर का चार दशक से अधिक का सेवाकाल अविस्मरणीय रहा है। जहां एक ओर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देकर नई दिशा दी है वहीं शाला प्रबंधन बोर्ड परीक्षा में रचनात्मक भूमिका निभाई।
धीरेंद्र राणा ने कहा कि सेवाकाल के अंतिम पड़ाव के बाद कर्मचारी की नई ज़िंदगी की शुरुआत होती है। अगर उसने सही तौर-तरीक़े से जीवन यापन किया तो जीवन में खालीपन कभी नहीं आएगा।
विशिष्ठ अतिथि अनिल भट्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी का जीवन कैसा है सब जानते हैं। पूजा-पाठ, धरम-करम, देशाटन, घूमने-फिरने तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि आराम और शांतिपूर्ण ज़िंदगी जीने के लिए तप-तपस्या और गरीबों की सेवा में जुट जाना चाहिए।
विशेष अतिथि प्रदीप खोचे ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी का हाल कैसा होता है? उसके बैंक बैलेंस, जमा-पूंजी और पेंशन पर निगाहें रहती है जबकि उसकी बुढ़ापे में देखभाल करना चाहिए।
विशेष अतिथि गोपाल अग्रवाल ने कहा कि रिटायर कर्मचारी की हालत चिंतनीय है वह पोते-पोतियों को स्कूल लाने ले जाने, हाट-बाज़ार के कामों में लगा रहता है।
प्रेमलता बुनकर ने अपने जीवनसाथी के साथ निभाये पलों को स्मरण करते हुए वैवाहिक दाम्पत्य जीवन के अनुभव व स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कुछ संस्मरण को किस्सागोई के साथ बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिन्यार पावऱी ने बताया कि सेवाकाल के बाद शिक्षककर्मी के पास न तो कोई शिष्य रह पाते हैं और न कोई पद-पद्वी। आज के बाज़ारवाद युग में सब को भुला दिया जाता है। हालाँकि शिक्षक एक ऐसा कर्मचारी होता है जिसे आम लोगों की दृष्टि में सम्मान के भाव से देखा जाता है। श्री बुनकर ने चार दशक से अधिक समय तक अपनी सेवाएं दी है। साथ ही योग जैसी विधा से भी विद्यार्थियों को लाभान्वित किया।
सम्मानित शिक्षक अशोक बुनकर ‘देवल’ ने अपने विदाई समारोह के दौरान प्रतिउत्तर में कहा कि मैं शिक्षा विभाग के कर्मचारी, अधिकारी, शिक्षक, शिक्षार्थियों को हृदय से कृतज्ञता प्रकट करता हूं। आपके सहयोग मार्गदर्शन का ऋणी रहूंगा। सेवाकाल के अंतिम पड़ाव में मैं आपकी स्मृतियों को सहेजे रखूँगा।
कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों के द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप ज्योति प्रज्वलन से हुई। सरस्वती वंदना का गायन शीतल मालवीय, जागृति, वंदना, शिवानी, लक्ष्मी, तनु सोलंकी आदि बालिकाओं ने प्रस्तुति दी। स्वागत भाषण ज्योति गुप्ता ने दिया। अतिथिजनों का स्वागत पुष्प मालाओं से आशा अग्रवाल, अब्दुल रज़ाक़ कुरेशी, राकेश चौधरी, अभिजीतसिंह बैस, रविन्द्रपाल तंवर, दीपक जावले, जितेन्द्र मालवीय, अंजली देशमुख आदि ने किया। विद्यालय परिवार की ओर से अशोक बुनकर को शाल-श्रीफल, उपहार भेंट कर अभिनंदन पत्र भी दिया गया। अभिनंदन पत्र का वाचन बिंदुबाला शर्मा ने किया।
इस मौक़े पर प्रेमलता बुनकर, कुलदीप सिंह, मुस्कान सिंह, दिवित सिंह, आस्था बुनकर परिवार आमंत्रित थे। पालक अभिभावक, गणमान्य नागरिक, स्कूली बच्चे सहित बड़ी तादाद में गांव के लोगों ने शिरकत की। संचालन मेहरबान सिंह ने तथा आभार प्रदर्शन धीरेन्द्रसिंह राणा ने किया।




