धर्म-अध्यात्म

करवा चौथ की पूजा कैसे करें? जानिए संपूर्ण विधि, पूजन मंत्र और व्रत का धार्मिक महत्व

Share

 

 

देवास। करवा चौथ का व्रत भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास, समर्पण और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन सुहागिन महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य तथा दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व है।

श्री सनातन ज्योतिष व अनुष्ठान केंद्र के पं. संदीप शास्त्री ने बताया कि करवा चौथ की पूजा श्रद्धा, शुद्धता और विधि-विधान के साथ करनी चाहिए। इस व्रत में पूजा-पाठ के साथ-साथ पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और पारस्परिक सम्मान बनाए रखने का संकल्प भी महत्वपूर्ण है।

करवा चौथ की पूजा-विधि
पं. शास्त्री जी के अनुसार, करवा चौथ के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अपनी परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा के लिए चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

पूजन सामग्री में करवा, जल, रोली, अक्षत, पुष्प, दीपक, धूप, फल, मिठाई और सुहाग की सामग्री रखें।

भगवान गणेश का पूजन-
सर्वप्रथम भगवान गणेश का पूजन करके व्रत निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना करें।
मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः॥

भगवान शिव एवं माता पार्वती का पूजन:
भगवान शिव को पुष्प, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित कर अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
भगवान शिव का मंत्र: ॐ नमः शिवाय॥
माता पार्वती का मंत्र: ॐ पार्वत्यै नमः॥

करवा चौथ व्रत कथा: पूजन के पश्चात करवा चौथ की पारंपरिक व्रत कथा सुनें या पढ़ें। कथा के दौरान भगवान से परिवार की सुख-शांति, पति के उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना करें।

चंद्रदेव की पूजा एवं अर्घ्य-
रात्रि में चंद्रमा के दर्शन होने पर चंद्रदेव को जल अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक पूजा करें। परंपरा के अनुसार छलनी से चंद्रमा तथा पति के दर्शन करके व्रत का पारण किया जाता है।

चंद्रदेव का मंत्र:
ॐ सोमाय नमः॥

चंद्रदेव की प्रार्थना का मंत्र—

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

इस मंत्र का भाव है कि श्वेत कांति वाले तथा भगवान शिव के मस्तक के आभूषण चंद्रदेव को नमन किया जाता है।

करवा चौथ का आध्यात्मिक संदेश:
पं. संदीप शास्त्री ने बताया कि व्रत का वास्तविक महत्व केवल उपवास रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, त्याग और समर्पण को मजबूत करने का अवसर भी है। परिवार में एक-दूसरे के प्रति सम्मान, मधुर वाणी और सहयोग से ही गृहस्थ जीवन सुखमय बनता है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करने चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर निर्जला व्रत रखने के लिए स्वयं पर दबाव नहीं डालना चाहिए।

पं. संदीप शास्त्री जी ने सभी सुहागिन महिलाओं को करवा चौथ की शुभकामनाएँ देते हुए सुखी, समृद्ध और मंगलमय दांपत्य जीवन की कामना की।

पं. संदीप शास्त्री
श्री सनातन ज्योतिष व अनुष्ठान केंद्र
संपर्क – 7974531063

Back to top button