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सफलता की राह में बाधक हैं छह दोष, इनसे दूर रहकर ही होगा व्यक्तित्व का विकास

आनंद मार्ग के विश्वस्तरीय धर्म महासम्मेलन में पुरोधा प्रमुख ने बताई सकारात्मक सोच की अहमियत

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देवास। जीवन में सफलता हासिल करने के लिए केवल लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन आदतों को भी छोड़ना जरूरी है, जो व्यक्ति की प्रगति में बाधा बनती हैं। निद्रा, तंद्रा, भय, क्रोध, आलस्य और टालमटोल ऐसे छह दोष हैं, जिनसे दूर रहकर व्यक्ति अपनी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक क्षमताओं का बेहतर विकास कर सकता है।

यह विचार आनंद मार्ग प्रचारक संघ के पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने बिहार के जमालपुर में आयोजित तीन दिवसीय विश्वस्तरीय धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन व्यक्त किए।

आलस्य पर विजय से खुलेगी उन्नति की राह-
आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने विदुर नीति की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन में उन्नति चाहने वालों को छह दोषों से बचना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से आलस्य के विभिन्न रूपों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आध्यात्मिक आलस्य मनुष्य को साधना में आगे बढ़ने से रोकता है, जबकि शारीरिक आलस्य उसे श्रम और सक्रिय कर्म से दूर करता है। इन बाधाओं पर विजय पाकर ही व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि निर्भयता और सकारात्मक सोच का विकास करना आनंद मार्ग के उद्देश्यों में शामिल है।

शुभ कार्य में देरी नहीं, गलत कार्य से दूरी जरूरी-
पुरोधा प्रमुख ने ‘शुभस्य शीघ्रम, अशुभस्य कालहरणम्’ सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि अच्छे कार्यों को तुरंत करना चाहिए, जबकि अनुचित कार्यों से बचना चाहिए। इसी विचार के आधार पर जमालपुर में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में नई मुहिम शुरू करने की योजना है। इसका मॉडल देश के अन्य हिस्सों में भी लागू करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

30 देशों के अनुयायी महासम्मेलन में शामिल-
आचार्य सिद्धार्थानंद अवधूत ने बताया कि महासम्मेलन में 30 देशों के 45 विदेशी अनुयायियों के साथ भारत के विभिन्न राज्यों से साधक-साधिकाएं शामिल हुए हैं। सम्मेलन में आचार्य प्रवेशानंद अवधूत, आचार्य अमलेशानंद अवधूत, आचार्य मेघदीपानंद अवधूत, आचार्य मधुव्रतानंद अवधूत, आचार्य पुष्पेंद्रानंद अवधूत, आचार्य सवितानंद अवधूत, आचार्य रागानुगानंद अवधूत, आचार्य नभातीतानंद अवधूत, आचार्य कृष्णकमलानंद अवधूत और आचार्य नित्यशिवानंद अवधूत सहित अन्य संत उपस्थित हैं।

क्रोध पर नियंत्रण भी सफलता के लिए जरूरी-
आनंद मार्ग प्रचारक संघ देवास के हेमेन्द्र निगम ‘काकू’ ने बताया कि पुरोधा प्रमुख ने व्यावहारिक जीवन में सफलता के लिए सकारात्मक गुणों को विकसित करने और नकारात्मक सोच से बचने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन का उद्देश्य बंधनों से ऊपर उठकर अपनी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक क्षमताओं का समुचित विकास करना होना चाहिए। क्रोध के कारण व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो सकता है और आवेश में ऐसी बात कह या ऐसा काम कर सकता है, जिसका बाद में उसे पछतावा होता है। इसलिए जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्मसंयम और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

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