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लेदर के नाम पर रेग्जीन की जैकेट तो नहीं खरीद रहे आप? इन तरीकों से समझें अंतर

सर्दी शुरू होते ही बाजार में बढ़ी जैकेट की बिक्री

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फेरी वालों के पास भी मिल रहे कई डिजाइन; खरीदने से पहले लेबल और कपड़े की बनावट जरूर जांचें 

देवास। सर्दियों की आहट के साथ ही बाजार में गर्म कपड़ों की खरीदारी शुरू होने लगी है। स्वेटर और गर्म कपड़ों की दुकानों पर जैकेट के नए डिजाइन नजर आने लगे हैं। वहीं, गली-मोहल्लों में फेरी लगाकर जैकेट बेचने वाले भी पहुंच रहे हैं।

कम कीमत से लेकर महंगे दाम तक मिलने वाली इन जैकेट में एक बड़ा सवाल यह है कि जिसे दुकानदार लेदर जैकेट बता रहा है, वह वास्तव में असली चमड़े की है या रेग्जीन जैसी कृत्रिम सामग्री से बनी है।

दिखने में दोनों तरह की जैकेट काफी हद तक एक जैसी हो सकती हैं। चमकदार सतह, आकर्षक डिजाइन और चमड़े जैसी बनावट के कारण पहली नजर में इनके बीच अंतर करना आसान नहीं होता। ऐसे में ग्राहक केवल बाहरी रूप देखकर जैकेट खरीद लेते हैं और बाद में पता चलता है कि वह असली लेदर की जगह कृत्रिम सामग्री से बनी है। हालांकि, रेग्जीन की जैकेट अपने आप में खराब नहीं होती। असली बात यह है कि ग्राहक को सामग्री की सही जानकारी हो और वह उसी के अनुसार कीमत चुकाए।

सबसे पहले जैकेट का लेबल देखें-
असली लेदर और कृत्रिम लेदर में अंतर समझने का पहला तरीका जैकेट पर लगा लेबल या उत्पाद की जानकारी पढ़ना है। यदि उस पर Genuine Leather, Real Leather, Full-Grain Leather या Top-Grain Leather लिखा है, तो यह प्राकृतिक चमड़े की ओर संकेत करता है। हालांकि, केवल लिखे हुए शब्दों पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय निर्माता और उत्पाद की जानकारी भी जांचें।

इसके विपरीत PU Leather, PVC, Synthetic Leather, Faux Leather या Man-Made Material जैसे शब्द कृत्रिम सामग्री की पहचान हो सकते हैं। यदि जैकेट पर सामग्री की स्पष्ट जानकारी नहीं है, तो दुकानदार से सीधे पूछें कि यह असली चमड़े की है या सिंथेटिक सामग्री की।

सतह की बनावट पर दें ध्यान-
असली चमड़े की सतह पर प्राकृतिक बनावट में थोड़ा अंतर दिखाई दे सकता है। कहीं बारीक रेखाएं, कहीं हल्के निशान और कहीं बनावट में मामूली बदलाव नजर आ सकते हैं। इसके विपरीत रेग्जीन पर चमड़े जैसी बनावट मशीन से बनाई जा सकती है, जिससे कई हिस्सों में एक जैसा पैटर्न दिखाई देता है।

हालांकि, यह अंतर हर जैकेट में स्पष्ट नहीं होता। असली चमड़े को भी विशेष प्रक्रिया से काफी चिकना बनाया जा सकता है, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाली कृत्रिम जैकेट पर प्राकृतिक चमड़े जैसी बनावट तैयार की जाती है। इसलिए केवल सतह देखकर अंतिम फैसला न करें।

सिलाई और किनारों को भी जांचें-
जैकेट के जिपर, जेब, कफ और सिलाई के आसपास के हिस्सों को ध्यान से देखें। जहां सामग्री का किनारा स्वाभाविक रूप से दिखाई देता हो, वहां उसकी बनावट को समझने की कोशिश करें।

असली चमड़े के खुले किनारे पर रेशेदार बनावट दिखाई दे सकती है, जबकि रेग्जीन में ऊपर की कृत्रिम परत के नीचे कपड़े या दूसरी आधार सामग्री की परत नजर आ सकती है। लेकिन कई जैकेट में किनारों को इस तरह ढका जाता है कि अंतर पहचानना मुश्किल हो जाता है। इसलिए जैकेट को काटकर या नुकसान पहुंचाकर जांच करने के बजाय उपलब्ध किनारों और अंदरूनी हिस्सों को देखें।

गंध और छूने के अनुभव से मिल सकता है संकेत-
प्राकृतिक चमड़े में एक विशिष्ट गंध हो सकती है, जबकि कृत्रिम सामग्री से प्लास्टिक या रसायन जैसी गंध आ सकती है। इसी तरह, छूने पर असली चमड़े की बनावट और लचीलापन कृत्रिम सामग्री से अलग महसूस हो सकता है।

लेकिन यह तरीका भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। जैकेट की फिनिशिंग, रंग, पॉलिश और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री से गंध व स्पर्श बदल सकते हैं। कुछ कृत्रिम जैकेट भी काफी मुलायम होती हैं और कुछ असली चमड़े की जैकेट कठोर महसूस हो सकती हैं। इसलिए गंध या स्पर्श के आधार पर ही जैकेट को असली या नकली घोषित नहीं किया जा सकता।

बहुत कम कीमत देखकर न करें फैसला-
असली चमड़े की जैकेट सामान्यतः समान डिजाइन वाली कृत्रिम जैकेट से महंगी हो सकती है। इसकी वजह सामग्री के साथ-साथ निर्माण, फिनिशिंग और ब्रांड भी होते हैं। दूसरी ओर, रेग्जीन की जैकेट कम बजट में कई डिजाइन और रंगों में उपलब्ध हो सकती हैं।

फिर भी केवल कीमत से असली लेदर की पहचान नहीं की जा सकती। महंगी जैकेट का कृत्रिम सामग्री से बना होना भी संभव है और छूट पर मिलने वाला उत्पाद असली चमड़े का भी हो सकता है। इसलिए कीमत को केवल एक संकेत मानें, पक्का प्रमाण नहीं।

खरीदने से पहले दुकानदार से पूछें ये सवाल-
जैकेट खरीदते समय ग्राहक कुछ सीधे सवाल पूछकर भ्रम से बच सकते हैं। क्या जैकेट प्राकृतिक चमड़े की है या PU/PVC जैसी कृत्रिम सामग्री की? क्या इसकी सामग्री का विवरण लेबल पर लिखा है? क्या खरीद का बिल मिलेगा? यदि उत्पाद को असली लेदर बताया जा रहा है, तो क्या इसकी पुष्टि उत्पाद की पैकिंग, टैग या निर्माता की जानकारी से हो सकती है?

फेरी वालों से खरीदारी करते समय भी सामग्री और कीमत स्पष्ट कर लें। भुगतान के बाद बिल या खरीद का कोई प्रमाण मिल सके तो उसे संभालकर रखें। यदि जैकेट को असली चमड़े का बताकर बेचा गया है, लेकिन बाद में सामग्री अलग निकलती है, तो खरीद के प्रमाण के साथ विक्रेता से शिकायत की जा सकती है।

सही जानकारी जरूरी-
लेदर और रेग्जीन की जैकेट के बीच चुनाव ग्राहक के बजट, पसंद, इस्तेमाल और देखभाल की जरूरत पर निर्भर करता है। असली चमड़ा पसंद करने वाले ग्राहक को उसकी पुष्टि के लिए सामग्री का विवरण जांचना चाहिए, जबकि कम कीमत और अलग-अलग डिजाइन चाहने वालों के लिए कृत्रिम सामग्री भी विकल्प हो सकती है।

सबसे जरूरी बात यह है कि ग्राहक को जिस सामग्री के नाम पर जैकेट बेची जा रही है, वह उसी के अनुरूप हो। खरीदारी में जागरूकता ही अनावश्यक खर्च और गलत जानकारी से बचने का बेहतर तरीका है।

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