गायत्री शक्तिपीठ एवं गायत्री प्रज्ञापीठ पर श्रावणी उपाकर्म सम्पन्न

– गायत्री साधकों ने हेमाद्रि संकल्प कर दस स्नान किया
– विश्व संस्कृत दिवस भी मनाया गया
देवास । गायत्री शक्तिपीठ साकेत नगर एवं गायत्री प्रज्ञापीठ विजय नगर देवास पर प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी रक्षाबंधन के पावन पर्व पर श्रावणी उपाकर्म का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ एवं गायत्री शक्तिपीठ साकेत नगर पर विश्व संस्कृत दिवस भी मनाया गया।
गायत्री शक्तिपीठ के मीडिया प्रभारी विक्रमसिंह चौधरी ने बताया कि प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी श्रावणी पर्व (पूर्णिमा) पर गायत्री शक्तिपीठ साकेत नगर एवं गायत्री प्रज्ञापीठ विजय नगर पर हेमाद्रि संकल्प कर दस स्नान किया। ऋषि तर्पण के साथ अपने गुरु, पूर्वजों और परिवार जनों की आत्म शान्ति हेतू तर्पण का कर्मकांड सम्पन्न हुआ साथ हि नवीन यज्ञोपवित धारण किया गया।
श्रावणी उपाकर्म का संचालन करते हुए गायत्री शक्तिपीठ के परिव्राजक रामनिवास कुशवाह ने कहा कि शरीर का निर्माण तो हो गया, शरीर तो छूट जाएगा लेकिन शरीर के बाद भी आपकी आत्मा की दुर्गति न हो, आत्म निर्माण हो इसलिए तर्पण किया जाता हैं। इस दिन भाई बहन और मित्र परस्पर एक दूसरे को रक्षा सूत्र बांधकर शुभ संकल्प लेते है। रक्षाबंधन बहन की, संस्कृति की, राष्ट्र की रक्षा हेतु बंधन से जोडने का प्रतीक त्यौहार है। श्रावणी पर्व के शुभ अवसर पर विश्व संस्कृत दिवस भी मनाया गया।

इस अवसर पर संस्कृत भारती देवास विभाग संयोजक कृष्णकांत शर्मा ने कहा कि सन 1969 से भारत में संस्कृत दिवस घोषित होकर मनाया जा रहा हैं। आज के समय में संस्कृत भाषा की शिक्षा के प्रति लोगों में कमी देखी जा रहीं हैं। इसके प्रचार प्रसार के लिए हमें अपने बच्चों को शुरुआत से ही इसकी शिक्षा देनी होगी।
इसके पूर्व श्रीवेदमाता गायत्री, परम पूज्य गुरूदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्यजी, वंदनीया माता भगवतीदेवी शर्मा व ऋषियों का पूजन एवं देवआव्हान कर पंचकुण्डीय गायत्री महायज्ञ प्रारंभ कर पूर्णाहूति की गई जिसमें विश्व शांति, विश्व कल्याण, विश्व पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन तथा इस वर्ष अच्छी वर्षा हो इसके लिए विशेष मंत्रों द्वारा यज्ञ में विशेष आहुतियां दी गई।
इसी प्रकार गायत्री प्रज्ञापीठ विजय नगर पर भी गायत्री प्रज्ञापीठ की संरक्षिका दुर्गा दीदी के सानिध्य में श्रावणी उपाकर्म सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में महेश पण्डया, कन्हैयालाल मोहरी, राजेन्द्र पोरवाल, देवीशंकर तिवारी, विक्रमसिंह राजपूत, सुरेश चौहान, चंद्रिका शर्मा, सोमेश्वर सोलंकी, शेषनारायण परमार, विजेंद्रसिंह बेस, सुभाष धोते, सालगराम सकलेचा, प्रदीप दुबे, ज्ञानदेव बोड़खे, सुरेश बालपांडे, डॉ. दिलीपसिंह सोलंकी, सतीश शर्मा, महेन्द्र राठौर, अनिल पंडित, ओमप्रकाशसिंह बनाफर, रमेशचंद्र पालीवाल, मोहन परिहार, राकेश दुबे, शीला श्रीवास्तव, विष्णु प्रसाद राठौर, प्रहलाद श्रोतीय, तारा चौहान, अशोक शर्मा, सुरेश चंद्रवंशी, कन्हैयालाल शर्मा, अंकुर राजपूत, महेश प्रजापति सहित अनेक परिजन उपस्थित थे ।
शक्तिपीठ पर श्रावणी उपाकर्म का संचालन परिव्राजक रामनिवास कुशवाह ने किया एवं प्रज्ञापीठ पर महेश आचार्य ने किया।




