कर्तव्यनिष्ठा का मिला सम्मान: 32 साल की सेवा के बाद गोविंद प्रसाद घाटिया बने उप संचालक, रूपेश तमोली व ज्योति गुप्ता को भी पदोन्नति

गोविंद प्रसाद बोले- पदोन्नति केवल पद नहीं, जनसेवा के प्रति शासन के विश्वास और बढ़े हुए दायित्व का प्रतीक
रूपेश तमोली ने कहा- अब इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बदल रहे हैं अभियोजन की तस्वीर, सीसीटीवी और डिजिटल एविडेंस से मजबूत हो रही पैरवी
देवास। अपराधियों को सजा दिलाने के लिए साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने और शासन का पक्ष मजबूती से रखने में अभियोजन विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। न्यायालय में वर्षों से इसी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे तीन अभियोजन अधिकारियों को पदोन्नति मिली है।
जिला लोक अभियोजन अधिकारी गोविंद प्रसाद घाटिया उप संचालक पद पर पदोन्नत हुए, जबकि रूपेश तमोली और ज्योति गुप्ता जिला अभियोजन अधिकारी बने। इस उपलब्धि पर न्यायालय परिसर में उनका सम्मान किया गया।

इस दौरान जिला लोक अभियोजन अधिकारी (डीपीओ) गोविंद प्रसाद घाटिया के उप संचालक पद पर पदोन्नत होने पर उनका अभिनंदन किया गया। श्री घाटिया पिछले 32 वर्षों से अभियोजन सेवा में कार्यरत हैं और विभिन्न महत्वपूर्ण आपराधिक प्रकरणों में शासन का सफलतापूर्वक पक्ष रखते हुए न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती प्रदान करते रहे हैं।
इसी प्रकार रूपेश तमोली को सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी से जिला अभियोजन अधिकारी तथा ज्योति गुप्ता को भी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी से जिला अभियोजन अधिकारी पद पर पदोन्नति मिली। श्री तमोली पिछले 17 वर्षों से अभियोजन सेवा में कार्यरत हैं।
पदोन्नति जिम्मेदारी और विश्वास दोनों बढ़ाती है-
उप संचालक पद पर पदोन्नत हुए गोविंद प्रसाद घाटिया ने कहा कि पदोन्नति केवल पद में वृद्धि नहीं होती, बल्कि यह बढ़े हुए उत्तरदायित्व और जनसेवा के प्रति शासन द्वारा व्यक्त किए गए विश्वास का प्रतीक होती है। उन्होंने कहा कि अभियोजन अधिकारियों का दायित्व केवल मुकदमे लड़ना नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करने की प्रक्रिया को निष्पक्ष और प्रभावी बनाना भी है।
डिजिटल दौर में साक्ष्य पहले से अधिक मजबूत-
जिला अभियोजन अधिकारी बने रूपेश तमोली ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में आपराधिक मामलों की जांच और अभियोजन प्रणाली में बड़ा बदलाव आया है। अब सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस न्यायालय में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आ रहे हैं। इससे अपराधों को साबित करना पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुआ है। उन्होंने बताया कि न्यायालयीन प्रक्रियाएं भी तेजी से ऑनलाइन हो रही हैं, जिससे मामलों के संचालन में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ी हैं।
अपराधियों को सजा दिलाने की अहम कड़ी है अभियोजन विभाग-
न्याय व्यवस्था में अभियोजन विभाग महत्वपूर्ण कड़ी होता है। पुलिस द्वारा प्रस्तुत केस डायरी और साक्ष्यों का परीक्षण कर न्यायालय में शासन की ओर से प्रभावी पैरवी करना, गवाहों को प्रस्तुत करना, कानूनी तर्क रखना और दोषियों को सजा दिलाने का प्रयास करना अभियोजन अधिकारियों की प्रमुख जिम्मेदारी है। इसके साथ ही विभिन्न शासकीय विभागों को कानूनी सलाह देना और न्यायालयीन मामलों में उनका मार्गदर्शन करना भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।




