रजोनिवृत्ति (Menopause) क्या है? जानिए लक्षण, कारण और बचाव के आसान उपाय

रजोनिवृत्ति कोई बीमारी नहीं, जीवन का स्वाभाविक बदलाव है: डॉ. योगेन्द्रसिंह भदौरिया
देवास। रजोनिवृत्ति (Menopause) महिलाओं के जीवन का एक महत्वपूर्ण और स्वाभाविक चरण है, लेकिन इसके बारे में सही जानकारी का अभाव कई बार अनावश्यक चिंताओं को जन्म देता है।
45 से 55 वर्ष की आयु के बीच होने वाली इस प्रक्रिया में मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है और शरीर में कई हार्मोनल बदलाव देखने को मिलते हैं।
अमलतास इंस्टिट्यूट ऑफ होम्योपैथी हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर के प्राचार्य एवं अधीक्षक डॉ. योगेन्द्रसिंह भदौरिया ने रजोनिवृत्ति के लक्षण, स्वास्थ्य पर प्रभाव और इससे बचाव के उपायों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि रजोनिवृत्ति के प्रमुख कारण के रूप में महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) द्वारा एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन धीरे-धीरे कम होने लगता है। इन हार्मोनों की कमी के कारण शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तनों का अनुभव हो सकता है।
सामान्य लक्षण-
🔸मासिक धर्म का अनियमित होना और अंततः बंद हो जाना
🔸अचानक गर्मी लगना (Hot Flushes)
🔸रात में अत्यधिक पसीना आना
🔸चिड़चिड़ापन एवं मूड में बदलाव
🔸नींद न आना या बार-बार टूटना
🔸थकान एवं कमजोरी, सिरदर्द
🔸चिंता एवं अवसाद की प्रवृत्ति
🔸स्मरण शक्ति एवं एकाग्रता में कमी
🔸जोड़ों एवं मांसपेशियों में दर्द
🔸योनि में शुष्कता
स्वास्थ्य पर प्रभाव-
रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है, जैसे-
ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना), हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, वजन बढ़ना, मधुमेह का बढ़ा हुआ खतरा। इसलिए इस अवस्था में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं स्वस्थ जीवनशैली अत्यंत आवश्यक है।
बचाव एवं प्रबंधन
1. संतुलित आहार: हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम एवं विटामिन-डी युक्त आहार का सेवन करें।
2. नियमित व्यायाम: प्रतिदिन 30–45 मिनट पैदल चलना, योग एवं प्राणायाम, हल्के स्ट्रेचिंग व्यायाम करना।
3. मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान: तनाव कम करें, पर्याप्त नींद लें, ध्यान (Meditation) एवं योग अपनाएं, परिवार एवं मित्रों के साथ समय बिताएं।
4. नियमित स्वास्थ्य जांच: रक्तचाप, रक्त शर्करा (Blood Sugar), बोन डेंसिटी टेस्ट
स्तन एवं स्त्रीरोग संबंधी जांच करवाएं।
रजोनिवृत्ति एवं होम्योपैथी: होम्योपैथी में रजोनिवृत्ति से संबंधित लक्षणों का उपचार रोगी की संपूर्ण शारीरिक एवं मानसिक स्थिति के आधार पर किया जाता है। उचित चिकित्सकीय परामर्श के अंतर्गत व्यक्तिगत लक्षणों के अनुसार औषधि चयन किया जाता है, जिससे गर्मी लगना, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, चिंता तथा अन्य कष्टदायक लक्षणों के प्रबंधन में सहायता मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि रजोनिवृत्ति महिलाओं के जीवन का एक स्वाभाविक चरण है। सही जानकारी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, सकारात्मक सोच एवं समय-समय पर चिकित्सकीय परामर्श द्वारा इस अवस्था को स्वस्थ एवं सहज बनाया जा सकता है। जागरूकता और उचित देखभाल से महिलाएं रजोनिवृत्ति के बाद भी सक्रिय, स्वस्थ एवं आत्मविश्वासपूर्ण जीवन जी सकती हैं।




