मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बदली सवारी, पेट्रोल नहीं EV से करेंगे सफर

सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के बाद मुख्यमंत्री के कारकेड में शामिल हुई EV, दिया ऊर्जा बचत का संदेश
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को पहली बार पेट्रोल वाहन की जगह इलेक्ट्रिक वाहन से यात्रा की। अब वे राजधानी भोपाल में नियमित रूप से ईवी कार से सफर करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम हरित विकास, प्रदूषण नियंत्रण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास से स्टेट हैंगर भोपाल तक पेट्रोल से चलने चार पहिया वाहन के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) से यात्रा की। यह ईवी मुख्यमंत्री सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों पर खरा उतरने, फीचर्स की विधिवत् जांच एवं अन्य जरूरी प्रक्रियाओं का बारिकी से पालन करने के बाद मुख्यमंत्री के लघु कारकेड में बुधवार से शामिल कर ली गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अब राजधानी (भोपाल) में नियमित रूप से ईवी कार से ही यात्रा करेंगे। ये भी पढ़ें; लग्जरी कार छोड़ इलेक्ट्रिक स्कूटी से मंत्रालय पहुंचे ऊर्जा मंत्री तोमर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को ईंधन की अधिकतम बचत करने और मितव्यतापूर्ण यात्रा के साधन अपनाने का संदेश दिया है। इससे देश एवं प्रदेश में ईंधन की बचत को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम सभी का यह दायित्व है कि ऊर्जा एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सार्थक प्रयास करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। ये ईवी न केवल ईंधन की बचत करते हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अत्यंत लाभकारी साबित होते हैं। इन वाहनों से वायु प्रदूषण भी नहीं होता, शोर नगण्य होता है और इन वाहनों की संधारण लागत भी पारम्परिक ईंधन वाले वाहनों की तुलना में काफी कम होती है। संबंधित खबर; मुख्यमंत्री का अलग अंदाज: ना लग्जरी कार, ना बड़ा काफिला… CM मोहन यादव बस से पहुंचे उज्जैन
उन्होंने कहा कि ईंधन बचाने और पर्यावरण की रक्षा के लिए ईवी का उपयोग हम सभी के लिए हितकारी है। यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ईवी वाहनों के उपयोग से पारम्परिक ईंधन पर हमारी निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा और देश-प्रदेश में हरित विकास को भी नई गति मिलेगी।




