खेत-खलियान

3000 रुपए तक में बिकता है मध्यप्रदेश का ‘नूरजहां’ आम!

5 किलो तक वजन वाला यह आम विदेशों में बना सुपरहिट

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– आलीराजपुर के कट्ठीवाड़ा की पहचान बना ‘किंग ऑफ मैंगो’, UAE से लेकर अमेरिका तक बढ़ी डिमांड 

– किसानों के लिए बन रहा लाखों की कमाई का जरिया

भोपाल। मध्यप्रदेश का “नूरजहां” आम अब केवल एक फल नहीं, बल्कि प्रदेश की वैश्विक पहचान बन चुका है। आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पैदा होने वाला यह विशालकाय आम अपने 2 से 5 किलो तक वजन, अनोखी मिठास और शाही स्वाद के कारण देश-विदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। बाजार में एक आम की कीमत 1500 से 3000 रुपए तक पहुंच रही है। खाड़ी देशों, अमेरिका और ब्रिटेन तक इसकी बढ़ती मांग ने इसे “लक्ज़री मैंगो” का दर्जा दिला दिया है।

भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश का “नूरजहां” आम इस उपाधि को सच साबित करता नजर आता है। आलीराजपुर जिले के जनजातीय क्षेत्र कट्ठीवाड़ा में उगने वाला यह आम अपने विशाल आकार, गजब की मिठास और दुर्लभता के कारण देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी आकर्षण का केंद्र बन गया है।

सामान्य आम जहां कुछ सौ ग्राम के होते हैं, वहीं नूरजहां आम का वजन 2 से 5 किलो तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि इसे “किंग ऑफ मैंगो” कहा जाता है। इसका आकार इतना बड़ा होता है कि एक ही आम पूरे परिवार के लिए पर्याप्त माना जाता है। खास बात यह है कि इसकी कीमत भी किसी लग्ज़री फल से कम नहीं। बाजार में एक नूरजहां आम 1500 से 3000 रुपए तक बिक रहा है।

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विदेशों में बढ़ी जबरदस्त डिमांड
संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, कुवैत जैसे खाड़ी देशों में इस आम की भारी मांग देखी जा रही है। वहीं अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। बड़े आकार और प्रीमियम क्वालिटी के कारण विदेशी बाजारों में इसे “लक्ज़री मैंगो” माना जा रहा है। हालांकि नूरजहां आम का उत्पादन सीमित मात्रा में होता है, इसलिए इसका निर्यात बड़े पैमाने पर नहीं हो पाता

कैसे बना मध्यप्रदेश की शान?
नूरजहां आम का इतिहास मालवा और पश्चिमी भारत की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि मुगलकाल में बड़े आकार और विशेष स्वाद वाले आमों को शाही बागों में विशेष महत्व दिया जाता था। इसी परंपरा से जुड़ी यह किस्म समय के साथ गुजरात और झाबुआ-आलीराजपुर अंचल तक पहुंची।

माना जाता है कि नूरजहां आम की यह प्रजाति वर्षों पहले अफगान क्षेत्र से भारत आई थी। बाद में मालवा क्षेत्र से होते हुए यह झाबुआ-आलीराजपुर अंचल तक पहुंची।

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आलीराजपुर जिले के ग्राम जूना कट्ठीवाड़ा स्थित शिव (बावड़ी) आम फार्म के किसान भरतराजसिंह जादव के परिवार ने दशकों तक इसकी दुर्लभ प्रजाति को संरक्षित रखा। आज यही आम मध्यप्रदेश की उद्यानिकी पहचान बन चुका है। वे बताते हैं कि उनके पिता स्व. रणवीर सिंह जादव लगभग 55-60 वर्ष पूर्व गुजरात के बनमाह क्षेत्र से नूरजहां का पौधा लाए थे। उनके पिता ने ग्राफ्टिंग तकनीक से एक विशेष पौधा तैयार किया था।

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किसानों के लिए बना सोने की फसल-
नूरजहां आम की सबसे बड़ी खासियत इसकी दुर्लभता है। पेड़ों पर सीमित संख्या में फल लगते हैं, लेकिन हर फल हजारों रुपए में बिक जाता है। यही कारण है कि यह आम किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहा है। आधुनिक ग्राफ्टिंग तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन से अब इसके पौधों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही है।

राष्ट्रीय सम्मान भी दिला चुका है पहचान-
नूरजहां आम की विशिष्टता को देखते हुए वर्ष 1999 और 2010 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। इन सम्मानों ने न केवल किसानों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि आलीराजपुर जिले को भी देशभर में नई पहचान दिलाई।

मध्यप्रदेश के आमों की वैश्विक उड़ान-
प्रदेश सरकार और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीक, ड्रिप सिंचाई और उन्नत पौधों के लिए लगातार सहायता दी जा रही है। इसका असर यह है कि अब मध्यप्रदेश का आम केवल स्वाद की पहचान नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि और प्रदेश की वैश्विक ब्रांडिंग का प्रतीक बन चुका है।

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