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पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति के संबंध में उद्योगपतियों की बैठक आयोजित

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देवास। वैश्विक स्तर पर चल रहे वर्तमान परिदृश्य को दृष्टिगत रखते हुए उद्योगों को गैस की कमी से बचाने और उत्पादन को प्रभावित होने से रोकने के उद्देश्य से उद्योगपतियों की एक महत्वपूर्ण बैठक औद्योगिक क्षेत्र स्थित एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज के कार्यालय में आयोजित की गई।

बैठक में एमपीआईडीसी, आपूर्ति विभाग, गैस कंपनियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने शामिल होकर समस्याओं और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की। सभी संबंधित पक्षों ने भरोसा दिलाया कि वर्तमान स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन सामूहिक प्रयासों से जल्द सुधार किया जाएगा।

बैठक में एमपीआईडीसी क्षेत्रीय कार्यालय उज्जैन के जनरल मैनेजर विनयप्रतापसिंह तोमर ने कहा कि मौजूदा हालात को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। शासन, प्रशासन और गैस कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं ताकि उद्योगों पर इसका न्यूनतम असर पड़े। उन्होंने उद्योगपतियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि किसी भी समस्या की तत्काल जानकारी दें, जिससे उसका त्वरित समाधान किया जा सके। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने गैस कोटे का 5 प्रतिशत हिस्सा उद्योगों के लिए आरक्षित किया है, जिससे काफी हद तक गैस संकट से राहत मिलेगी। साथ ही उद्योगों को वैकल्पिक ईंधन अपनाने और पाइप गैस कनेक्शन लेने की सलाह भी दी गई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी इकाई को अनावश्यक परेशानी नहीं होने दी जाएगी और सभी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा।

उद्योगपतियों ने रखी अपनी समस्याएं-
एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष अशोक खंडेलिया ने बताया कि वर्तमान में गैस सप्लाई का 6 माह का एवरेज लिया जा रहा है। इसमें सीजनल उतार-चढ़ाव शामिल हो जाता है इसलिए उन्होंने इसे 3 माह का करने की मांग की। वहीं पहले उद्योगों को मिलने वाला 80 प्रतिशत गैस कोटा 65 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे अधिक खपत पर पेनल्टी रेट लगाने की बात कही जा रही है, लेकिन 15 मार्च के बाद की दरें स्पष्ट नहीं हैं, जिससे उद्योगपति असमंजस में हैं। इसके अलावा उन्होंने कैंटीन के लिए कमर्शियल एलपीजी की कमी, बिजली कटौती और डीजल आपूर्ति जैसे मुद्दे भी उठाए।

बैठक में उद्योगपतियों ने कहा कि 65 प्रतिशत गैस कोटा डेली बेसिस पर लागू होने से संचालन प्रभावित हो रहा है। मशीनों को गर्म करने में ही रोजाना काफी गैस खर्च हो जाती है, जिससे सीमित कोटे में हर दिन काम करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि बिलिंग साइकिल 15 दिन की कर दी जाए, जिससे वे बेहतर योजना बनाकर उत्पादन कर सकें। कुछ उद्योगपतियों ने बिजली कटौती और संडे शटडाउन की समस्या भी बताई, जिससे उत्पादन बाधित हो रहा है। वहीं, गैस प्रेशर कम होने की आशंका को लेकर भी चिंता जताई गई।

केंद्र से तय होता है कोटा-
गेल कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि गैस कोटे का निर्धारण केंद्रीय मंत्रालय से होता है। वे उद्योगपतियों का सुझाव वहां भेज देंगे। उन्होंने कहा कि गैस सप्लाई का प्रेशर कम नहीं होने दिया जाएगा और सभी तकनीकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा। जहां पाइप कनेक्शन नहीं है, वहां कनेक्शन देने के लिए तेजी से काम किया जाएगा। कैंटीन गैस सप्लाई में तकनीकी दिक्कतें हैं, क्योंकि कहीं लो-प्रेशर और कहीं हाई-प्रेशर लाइन मौजूद है। जहां संभव होगा, वहां 15 दिनों के भीतर नई लाइन डालकर कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

योजनाबद्ध निकालेंगे समाधान-
सहायक सप्लाई अधिकारी बीएस राय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कमर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता बहुत कम है, इसलिए आपूर्ति संभव नहीं हो पा रही है। उन्होंने उद्योगों को गेल कंपनी से पाइप गैस कनेक्शन लेने की सलाह दी और कहा कि जहां लाइन उपलब्ध नहीं है या जहां लो प्रेशर लाइन नहीं है, वहां भी समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने सभी उद्योगों से मासिक खपत और डीजल उपयोग का डेटा मांगा, ताकि सही योजना बनाकर समस्या का समाधान किया जा सके। साथ ही डीजल को बैरल में उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर से अनुमति दिलाने का प्रयास करने की बात भी कही।

टीम वर्क से होगा बेहतर काम-
बैठक के अंत में जीएम श्री तोमर ने एक बार फिर उद्योगपतियों को आश्वस्त किया कि यह एक अस्थायी स्थिति है और सभी विभाग मिलकर इसे जल्द सामान्य करेंगे। उन्होंने टीमवर्क पर जोर देते हुए कहा कि प्रशासन और उद्योग मिलकर काम करेंगे तो इस संकट से आसानी से बाहर निकला जा सकता है। उन्होंने कहा कि उद्योगों के सुचारू संचालन के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं और आने वाले समय में हालात निश्चित रूप से बेहतर होंगे।

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