खेत-खलियान

फसलों में लौटी रौनक, किसानों के चेहरे खिले

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रिमझिम बारिश फसल के लिए अमृत समान

बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। क्षेत्र में बीते एक सप्ताह से रुक-रुककर हो रही रिमझिम और झमाझम बारिश ने खेत-खलिहानों में नई जान फूंक दी है। मौसम की मेहरबानी ने किसानों की उम्मीदों को फिर से हरा-भरा कर दिया है। खेतों में खड़ी सोयाबीन और मक्का की फसलें अब पूरी रौनक पर हैं। किसान इन दिनों खेतों में खड़ी लहलहाती फसलों को देखकर गदगद हैं और कहते हैं कि यह बारिश फसल के लिए “अमृत की बूंदों” जैसी साबित हो रही है।

बारिश ने दी राहत-

कई दिनों तक मानसून की सुस्ती से किसान चिंतित थे, लेकिन पिछले सप्ताह से लगातार हो रही बारिश ने उनके माथे की शिकन दूर कर दी। खेतों में खड़ी फसलों ने पानी सोखकर नई चमक पाई है।

सोयाबीन फसल-

क्षेत्र की करीब 3500 हेक्टेयर भूमि पर बोई गई है। लगभग 1000 से अधिक किसान सीधे तौर पर इससे जुड़े हुए हैं। वर्तमान में पौधे 70 से 80 दिन के हो चुके हैं और फलियों में दाने भरने लगे हैं।

मक्का फसल-

खेतों में मक्का की ग्रोथ बेहतरीन हो रही है। पौधों की मजबूती और हरियाली देखकर किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है।

अन्य फसलें-

मूंगफली, उड़द और लाल तुवर की फसलें भी पानी पाकर दमक उठी हैं।

किसानों की उम्मीदें-

वरिष्ठ किसान विक्रम भगत, महेंद्र दांगी और केदार पाटीदार बताते हैं कि यह बरसात समय पर हो रही है, जिससे वर्तमान खरीफ की फसलें सुरक्षित हैं। लेकिन आगामी रबी फसल (गेहूं, चना, लहसुन, प्याज आदि) के लिए और बारिश की आवश्यकता है। उनका मानना है कि कम से कम 36 इंच बारिश और होना जरूरी है, तभी रबी सीजन के लिए पर्याप्त नमी और पानी उपलब्ध हो सकेगा।

खेतों में छाई खुशहाली, पर चिंता भी बाकी-

किसानों के चेहरे पर मुस्कान तो लौट आई है, लेकिन उनके मन में यह चिंता भी है कि अगर आने वाले दिनों में बारिश कमजोर पड़ी तो रबी की फसल प्रभावित हो सकती है। वर्तमान खरीफ फसलों को फिलहाल पर्याप्त पानी मिल रहा है, परंतु आगे भी समय-समय पर पानी गिरता रहना बेहद आवश्यक है।

इस क्षेत्र की बड़ी आबादी खेती पर ही निर्भर है। सोयाबीन, मक्का और अन्य दलहनी फसलें किसानों की रोज़ी-रोटी का प्रमुख साधन हैं। समय पर पानी मिल जाए तो ये फसलें न केवल किसानों को भरपूर उत्पादन देंगी बल्कि स्थानीय मंडियों में भी रौनक लौट आएगी।

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