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अमलतास विवि में राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर के 300 से अधिक विद्वानों ने की सहभागिता

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  • बौद्धिक ज्ञान के साथ शारीरिक ज्ञान भी आवश्यक- सांसद सोलंकी
  • विराट कोहली के पिता ने क्वालिटी पहचानी, तभी वह महान क्रिकेटर बना- विषय विशेषज्ञ अतुल कोठारी
  • आज शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की आवश्यकता- विधायक सोनकर

देवास। अमलतास विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान प्रणाली और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में शोध पत्र प्रस्तुति के लिए 300 से अधिक विशेषज्ञ विद्वान प्राध्यापक उपस्थित हुए।

सुबह उद्घाटन सत्र के बाद दोपहर 12 से 1.30 बजे तक विषय विशेषज्ञों के मध्य वक्तव्य हुआ। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विशेषज्ञों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन और भारतीय ज्ञान प्रणाली के परिपेक्ष्य में शिक्षण अधिगम प्रकिया के विकास और परिवर्तन पर विमर्श किया गया।

मुख्य अतिथि देवास सांसद महेंद्रसिंह सोलंकी, विधायक राजेश सोनकर, प्रो. सदानंद सप्रे, डॉ. सोमनाद दयानंद, डॉ. राजीव शुक्ला, डॉ. धीरेन्द्र शुक्ल, अमलतास ग्रुप के संस्थापक सुरेशसिंह भदौरिया और बांगर सरपंच दिलीप जाट ने कार्यशाला में सहभागिता की। सांसद श्री सोलंकी ने ज्ञान मंथन की इस कार्यशाला में कहा कि बौद्धिक ज्ञान के साथ शारीरिक ज्ञान भी आवश्यक है। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नौकरी प्राप्त करना ही नहीं हाेना चाहिए। शिक्षा से समझ विकसित होती है।

सोनकच्छ विधायक डॉ. राजेश सोनकर ने कहा, कि शिक्षा हमारी सबसे बड़ी ताकत है। अंग्रेजों ने मैकाले शिक्षा पद्धति से हमारी शिक्षा को आश्रम व्यवस्था, गुरुकूल व्यवस्था से दूर करने का षडयंत्र रचा। हम पर अंग्रेजी थोपने का प्रयत्न हुआ। इससे शिक्षा सीमित होकर रह गई। वह दौर भी आया जब देश आजाद हुआ तो हम उस समय पुरानी शिक्षा पद्धति को लागू कर सकते थे, लेकिन तत्कालीन सरकार ने मैकाले शिक्षा पद्धति को ही लागू कर दिया।

विधायक सोनकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई शिक्षा नीति को लागू किया है, एक बार फिर हमारे समाज, हमारे युवा का आत्मबल बढ़ा है। नई शिक्षा नीति 2020 वैदिक शिक्षण महाशक्ति के रूप में इस देश की पुर्नस्थापना करने के लिए लागू हुई है। वैदिक शिक्षा को धर्म से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। वैदिक शिक्षा तो हमारा ज्ञान है। इसमें हमें समाज के प्रति, परिवार के प्रति आचरण, व्यवहार कैसा होना चाहिए जैसी जानकारी भी है। आज शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, कि जब दुनिया में अक्षर बोध नहीं हुआ था, उस समय भी हमारी संस्कृति पूरी दुनिया को दिशा देने का कार्य कर रही थी। पुरातन संस्कृति में ज्ञान का अथाह भंडार था, लेकिन क्या कारण है कि अब यहां की शिक्षा सिर्फ नौकरी पाने वाली शिक्षा बन गई। विधायक सोनकर ने कहा कि ऐसा कहा जाता है कि किसी राष्ट्र को उसके धर्म, संस्कार, शिक्षा से दूर कर दिया जाए तो उसका स्वत: ही पतन हो जाता है। हमारे देश में कई आक्रमणकारी आए। हमारी संस्कृति को समाप्त करने के कई प्रयास हुए, लेकिन हम पूरी ताकत से खड़े रहे। इसका कारण था हमारी शिक्षा।

बच्चे के मानसिक स्तर का ध्यान रखते हुए पढ़ाना चाहिए-

विषय विशेषज्ञ डॉ. अतुल कोठारी ने लाइव कॉन्फरन्स में संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों को पढ़ाना एक कला है। बच्चे के मानसिक स्तर का ध्यान रखते हुए पढ़ाया जाना चाहिए। अगर उसके स्तर का ध्यान नहीं रखेंगे तो वह कैसे समझेंगे। शुरुआत में हर दिन 5-5 मिनट एक-दो बच्चे से कक्षा में बात करें और इसका परिणाम बहुत ही श्रेष्ठ होगा। आचार्य व शिष्य के बीच की दीवार ध्वस्त हो जाएगी। फिर बच्चा समस्याओं को लेकर आपसे बात कर सकेगा। बच्चे की क्वालिटी पहचानना जरूरी है।

उन्होंने विराट कोहली का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर विराट कोहली के पिता सोच लेते कि विराट को डॉक्टर बनाना है तो क्या वह डॉक्टर बनता। हर बच्चे में अपनी क्वालिटी होती है। कोई कला में, कोई पढ़ाई में तो कोई खेल में बेहतर कर सकता है। उनकी क्वालिटी को पहचानना चाहिए। बच्चों को पढ़ाने के लिए तैयारी करना पड़ती है। जो सिखाता है, वह सीखता भी है।

हम बच्चे को ज्ञान दे रहे हैं या जानकारी-

कार्यशाला में डॉ. सदानंद सप्रे ने संबोधित करते हुए कहा कि हमें भारतीय ज्ञान, परंपरा को बारिकी से समझना होगा। हमें कुछ करना है ऐसी प्रवृत्ति विकसित होना चाहिए। हम ज्ञान देते हैं या जानकारी। हम कई बार जानकारी देते हैं ज्ञान नहीं। हमारा पूरा जोर ज्ञान देने में होना चाहिए। जानकारी को ज्ञान में कैसे परिवर्तित करें यह शिक्षक को समझना होगा।

अतिथियों द्वारा कार्यशाला के ब्रौशर का विमोचन किया गया। इस कार्यशाला में देशभर से लगभग 300 से अधिक विद्वानों ने पंजीयन करवाया और इस विचार मंथन में भाग लिया। अमलतास विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. शरदचन्द्र वानखेड़े ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। वहीं कुलसचिव संजय रामबोले ने कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। अमलतास विश्वविद्यालय के चेयरमैन मयंक राज सिंह भदौरिया ने बताया कि इस दो दिवसीय कार्यशाला में विद्वानों द्वारा प्रस्तुत शोध पत्रों के माध्यम से शिक्षा प्रणाली के उच्च गुणवत्ता वाले विषयों पर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श किया जाएगा, जो भविष्य में शिक्षा पद्धति को समृद्ध करेगा।

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