ढोल-नगाड़ों के साथ घर लौटे 30 दंपती: परिवार न्यायालय में 93 मामलों का निराकरण, टूटने की कगार पर पहुंचे परिवारों में फिर बनी सहमति
नेशनल लोक अदालत में 1521 लंबित एवं 219 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण

आपसी समझौते से 5.25 करोड़ के अवार्ड: लंबित मामलों में करोड़ों की राशि का हुआ सेटलमेंट, चेक बाउंस के 210 मामले सुलझे
देवास। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवास कपिल मेहता के मार्गदर्शन में शनिवार को जिले के समस्त न्यायालयों में वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में कुल 1521 लंबित प्रकरणों तथा 219 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मेहता ने कहा कि “नेशनल लोक अदालत एक ऐसा यज्ञ है, जिसमें न्यायाधीशगण एवं अधिवक्तागण अपने श्रम, समय एवं अनुभव की आहुति देकर समाज में न्याय एवं सौहार्द की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।” उन्होंने कहा कि लोक अदालत केवल लंबित प्रकरणों के निराकरण का माध्यम नहीं है, बल्कि पक्षकारों के मध्य आपसी सौहार्द, सहयोग एवं सामाजिक समरसता स्थापित करने का प्रभावी मंच भी है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों, न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं पक्षकारों से अधिकाधिक प्रकरणों का आपसी सहमति एवं राजीनामे के आधार पर निराकरण कराने का आह्वान किया।

नेशनल लोक अदालत में परिवार न्यायालय, देवास ने विशेष उपलब्धि हासिल की। प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय जितेन्द्र सिंह कुशवाह द्वारा एकल बैठक में कुल 93 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इनमें 30 दंपतियों के पारिवारिक विवादों का आपसी सहमति एवं समझाइश के माध्यम से समाधान किया गया। विवादों के समाप्त होने के बाद 30 दंपती प्रसन्नता एवं उल्लास के वातावरण में ढोल-नगाड़ों के साथ अपने-अपने घरों के लिए रवाना हुए। यह दृश्य लोक अदालत की मूल भावना “विवाद का अंत, संबंधों की पुनः शुरुआत” को साकार करता नजर आया।
पारिवारिक विवादों के निराकरण में पक्षकारों की भावनाओं, पारिवारिक परिस्थितियों एवं आपसी संबंधों को ध्यान में रखते हुए समझाइश एवं सहमति के माध्यम से समाधान का प्रयास किया गया।
जनसहयोग से न्यायालय परिसर को मिली समर्पित एंबुलेंस-
न्यायालय परिसर में पक्षकारों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों अथवा अन्य व्यक्तियों की आकस्मिक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से न्यायिक परिवार एवं अधिवक्ता समुदाय के सहयोग से समर्पित एंबुलेंस की व्यवस्था की गई।
न्यायाधीशगण द्वारा 51 हजार रुपए तथा कर्मचारीगण द्वारा 24 हजार 100 रुपए का आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार एवं आवश्यक आपातकालीन चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था की गई है। यह सेवा न्यायालय परिसर में आने वाले पक्षकारों, आम नागरिकों, अधिवक्ताओं एवं न्यायालयीन कर्मचारियों के लिए निःशुल्क उपलब्ध रहेगी।

इस अवसर पर कहा गया कि न्यायालय का दायित्व केवल न्याय प्रदान करना ही नहीं, बल्कि आवश्यकता के समय मानवीय संवेदनाओं के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है। न्यायाधीशों, कर्मचारियों एवं अधिवक्ताओं के सामूहिक सहयोग से शुरू की गई यह सेवा इसी भावना का प्रतीक है।
35 न्यायिक खंडपीठों में हुई लोक अदालत-
नेशनल लोक अदालत में सिविल, आपराधिक, विद्युत अधिनियम, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (चेक बाउंस), श्रम, मोटर दुर्घटना दावा, बीएसएनएल सहित विभिन्न विषयों के प्रकरणों के निराकरण के लिए जिला मुख्यालय देवास सहित तहसील स्तर पर सोनकच्छ, कन्नौद, खातेगांव, टोंकखुर्द एवं बागली में कुल 35 न्यायिक खंडपीठों का गठन किया गया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कपिल मेहता ने विद्युत कंपनी, नगर निगम, बैंक, बीएसएनएल एवं बीमा कंपनियों सहित विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर अधिकाधिक प्रकरणों का आपसी सहमति एवं राजीनामे के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न न्यायिक खंडपीठों का भ्रमण कर कार्यवाही का अवलोकन भी किया।
1521 लंबित प्रकरणों में 52.55 करोड़ रुपये से अधिक के अवार्ड-
देवास जिले में आयोजित नेशनल लोक अदालत में कुल 1521 लंबित प्रकरणों का निराकरण हुआ। इनमें आपराधिक प्रकरण 614, मोटर दुर्घटना दावा 46, चेक बाउंस 210, फैमिली मैटर 51, विद्युत प्रकरण 201, श्रम प्रकरण 11, ट्रैफिक चालान 175, विविध 184, सिविल 27 तथा बैंक रिकवरी का 1 प्रकरण शामिल है।
निराकृत 1521 प्रकरणों में कुल 5 करोड़ 25 लाख 52 हजार 163 रुपये के अवार्ड पारित किए गए। इनमें 5 करोड़ 24 लाख 04 हजार 107 रुपये के अवार्ड आपसी समझौते के आधार पर पारित हुए। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के 210 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिनमें कुल 4 करोड़ 79 लाख 82 हजार 929 रुपये की चेक राशि का सेटलमेंट हुआ। इसके अतिरिक्त 219 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिनमें 14 लाख 80 हजार 561 रुपये राशि के अवार्ड पारित किए गए।
शुभारंभ कार्यक्रम में कलेक्टर एवं जिलादंडाधिकारी ऋतुराज सिंह, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय जितेन्द्र सिंह कुशवाह, प्रथम जिला न्यायाधीश उमाशंकर अग्रवाल, द्वितीय जिला न्यायाधीश नरेन्द्र पटेल, चतुर्थ जिला न्यायाधीश प्रसन्न सिंह बहरावत, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश डॉ. रविकांत सोलंकी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भारत सिंह कनेल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रोहित श्रीवास्तव सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, जिला विधिक सहायता अधिकारी दिलीप मुझाल्दा, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ रामप्रसाद सूर्यवंशी, सचिव अधिवक्ता संघ चंद्रपालसिंह सोलंकी, नगर निगम एवं विद्युत कंपनी के अधिकारी, बैंक अधिकारी, लीगल एड डिफेंस काउंसेल स्टाफ, लोक अभियोजन अधिकारी, अधिवक्तागण, पैरालीगल वालेंटियर्स एवं पक्षकार उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक गौड़ ने किया तथा आभार निलेन्द्र कुमार तिवारी ने व्यक्त किया।




