खेत-खलियान

बारिश के बाद सोयाबीन बोवनी शुरू: 20 हजार हेक्टेयर में बोवनी का अनुमान

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बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी आने से कृषि गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई गांवों में किसानों ने खेत तैयार करने के साथ ही सोयाबीन की बोवनी भी शुरू कर दी है।

शनिवार सुबह 6 बजे तक पिछले 24 घंटे में 41 मिमी (लगभग पौने दो इंच) बारिश दर्ज की गई, जिससे खरीफ फसलों की तैयारियों को गति मिली है। आज शाम को भी कुछ मिनट बारिश हुई थी।

सोयाबीन है प्रमुख फसल-
बेहरी सहित पूरे अंचल में हुई अच्छी बारिश से खेतों की मिट्टी में पर्याप्त नमी पहुंच गई है। इसके तुरंत बाद किसानों ने अपने ट्रैक्टरों और अन्य कृषि उपकरणों के साथ खेतों में काम शुरू कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों खेतों की जुताई, बोवनी जैसी कृषि गतिविधियां जोर-शोर से चल रही हैं।

मालवा में क्षेत्र सोयाबीन उत्पादन के लिए विशेष पहचान रखता है। यह जिले का सबसे बड़ा सोयाबीन रकबा है। कृषि विभाग के अनुमान के अनुसार, इस वर्ष भी लगभग 20 से 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई होने की संभावना है।

इस क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत रकबे में जल्दी पकने वाली (अर्ली) किस्में बोई जाती हैं, जबकि शेष 20 प्रतिशत में देर से पकने वाली वैरायटी का उपयोग होता है। क्षेत्र के किसान उन्नत खेती के लिए जाने जाते हैं और अधिकांशतः किसान एक वर्ष में तीन फसलें लेते हैं। सोयाबीन की कटाई के बाद प्याज लहसुन आलू और अन्य रबी फसलों की तैयारी करते हैं, जिसके बाद गेहूं और चना जैसी प्रमुख फसलें भी ली जाती हैं। यह चक्र उनकी कृषि आय में वृद्धि करता है।

किसानों को सावधानी बरतने की सलाह-
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी काशीराम चौहान ने किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसान सोयाबीन बोवनी में जल्दबाजी न करें। क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा हो गई है। केवल वर्तमान वर्षा के आधार पर बड़े पैमाने पर बोवनी करना जोखिम भरा हो सकता है। यदि आगामी दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो अंकुरण और फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।

कहीं बारिश का इंतजार-
साकतली के किसान कालूसिंह राठौर ने बताया कि गांव में कुछ किसानों ने बोवनी शुरू कर दी है, जबकि कई किसान अभी एक-दो बार अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि पर्याप्त नमी बनने के बाद सुरक्षित बोवनी की जा सके। वहीं आर्या के किसान चतुर्भुज भाटी ने बताया कि गांव के कुछ किसानों ने आठ दिन पहले हुई पहली बारिश के बाद ही बोवनी कर दी थी। अब हालिया वर्षा के बाद अन्य किसान भी खेत तैयार करने और बोवनी की तैयारी में जुट गए हैं।

बदल रहा है सोयाबीन की खेती का स्वरूप-
क्षेत्र में पिछले तीन दशकों में सोयाबीन की खेती का स्वरूप तेजी से बदला है। 1990 के दशक में किसानों के पास जेएस, पीके और एनआरसी-7 जैसी सीमित किस्में उपलब्ध थीं, लेकिन कृषि अनुसंधान एवं नई तकनीकों के कारण अब जल्दी पकने वाली उन्नत प्रजातियां किसानों की पहली पसंद बन चुकी हैं।

वर्तमान में जेएस-2172, जेएस-2117, जेएस-2303 और जेएस-2433 जैसी 90 से 100 दिन में पकने वाली किस्मों का क्षेत्र में व्यापक उपयोग हो रहा है। इन किस्मों के कारण किसानों को अगली फसल लेने के लिए अधिक समय मिल जाता है। इस वर्ष बाजार में ब्लैक गोल्ड, एनआरसी-150, जेएस-2555 और एनआरसी-268 जैसी नई एवं उन्नत सोयाबीन किस्मों की मांग तेजी से बढ़ी है।

बारिश से खरीफ सीजन की उम्मीद-
क्षेत्र में हुई पहली अच्छी बारिश ने खरीफ सीजन की उम्मीदों को नया बल दिया है। यदि आगामी दिनों में मानसून सक्रिय रहा तो सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों की बोवनी तेजी से बढ़ेगी और किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद रहेगी। फिलहाल खेतों में बढ़ी गतिविधियों से ग्रामीण अंचल में कृषि कार्यों की रौनक लौट आई है।

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