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विकास का इंतजार: बेहरी की छोटी पुलिया हर बारिश में काट देती है 4 ग्राम पंचायतों का संपर्क

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– लगभग 500 बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और ग्रामीणों की जिंदगी हर मानसून में दांव पर

बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। 17 साल पहले विकास के वादों के साथ बागली विधानसभा को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया था। लेकिन आज भी बागली मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर बेहरी के आगे बसे हजारों ग्रामीण हर बरसात में विकास के दावों की हकीकत झेलने को मजबूर हैं।

एक छोटी-सी पुलिया हर साल उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी पर बड़ा संकट बन जाती है।

दूसरे दिन भी उफान पर रही गुनेरा नदी, एक घंटे की रिमझिम वर्षा ने चार घंटे थमा दिया आवागमन 

बागली मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर स्थित बेहरी के आगे की चार आदिवासी पंचायतें आज भी हर बारिश में मुख्यालय से कट जाती हैं। कारण है बेहरी नदी पर बनी एक छोटी पुलिया (रपटा), जिस पर थोड़ी सी बारिश के बाद 3 से 4 फीट तक पानी बहने लगता है और कई घंटों तक आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है।

बेहरी के बाद धावड़िया, चारबर्डी और गुवड़ी सहित कई आदिवासी बहुल गांव आते हैं। इन पंचायतों के चैनपुरा, खेड़ा, पाजरिया, चारबर्डी, धावड़िया, चौपाल, बावड़ीखेड़ा, गोपालपुरा, टिमराणीय सहित अनेक गांवों के लोग इसी रास्ते से बागली आते-जाते हैं। बारिश के मौसम में यह संपर्क पूरी तरह बाधित हो जाता है।

सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है। क्षेत्र के करीब 500 बच्चे प्रतिदिन बागली के संदीपनी हायर सेकेंडरी स्कूल सहित अन्य विद्यालयों में पढ़ने आते हैं। नदी में पानी बढ़ने पर अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताने लगती है। कई बार बच्चे देर रात 10 से 11 बजे तक घर पहुंचते हैं। मजबूरी में अभिभावक जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से वाहन निकालकर बच्चों को घर ले जाते हैं, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।

ग्रामीण एवं अनुसूचित जाति-जनजाति मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष तथा जिला पंचायत सदस्य राम सिंह ओसारी का कहना है कि हर सुबह सबसे पहले नदी का जलस्तर देखना पड़ता है। यदि पानी ज्यादा हो तो बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते। बड़ा पुल नहीं होने से शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब 25 वर्षों से नदी पर बड़ा पुल बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। बरसात में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना, गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्र ले जाना, राशन और जरूरी सामान लाना तक मुश्किल हो जाता है।

क्षेत्रवासियों ने बताया कि यदि वे किसी काम से बाहर जाते हैं तो घर फोन कर पहले यह पूछना पड़ता है कि नदी पर पानी तो नहीं है। यदि पुलिया डूब जाती है तो उन्हें होटल या रिश्तेदारों के यहां रुकना पड़ता है। एक छोटी पुलिया पूरे क्षेत्र की जिंदगी को थाम देती है।

इस संबंध में विधायक मुरली भंवरा का कहना है ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए नदी पर पुल बनाने के लिए मैं प्रयासरत हूं। मेरी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के संभागीय अधिकारी से चर्चा हुई है। शीघ्र ही पुल निर्माण संबंधित सर्वे किया जाएगा।

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