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एक बीघा जमीन से सालाना 3 लाख रुपए का मुनाफा, देवास के किसान जगदीश नागर ने बदली खेती की तस्वीर

खीरा-तरबूज और खरबूज की खेती से बढ़ाई आमदनी; बलराम कृषि महोत्सव में मिला सम्मान

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देवास। खेती में बेहतर कमाई के लिए बड़ी जमीन होना ही जरूरी नहीं है। सही फसल का चयन, आधुनिक तकनीक और साल में एक से अधिक फसल लेने की रणनीति अपनाकर कम जमीन से भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है।

देवास जिले के मेंढकी धाकड़ निवासी प्रगतिशील किसान जगदीश नागर ने इसे अपनी मेहनत और नवाचार से साबित किया है। उन्होंने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी फसलों और फसल विविधीकरण को अपनाया। इसका परिणाम है कि वे महज एक बीघा जमीन से साल में तीन फसलें लेकर लगभग 3 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ अर्जित कर रहे हैं।

एक बीघा जमीन, तीन फसलें और बेहतर कमाई-
किसान जगदीश नागर ने बताया कि पहले की परंपरागत खेती के बजाय उन्होंने बाजार की मांग और फसलों की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उद्यानिकी फसलों की खेती शुरू की। वे अपने खेत में खीरा, लौकी, मिर्च, टमाटर सहित विभिन्न सब्जियों का उत्पादन करते हैं। इसके साथ ही खीरा, खरबूज और तरबूज जैसी फसलों के माध्यम से कम जमीन का अधिकतम उपयोग करने का प्रयास करते हैं।

उनके अनुसार, एक बीघा जमीन में खीरे की खेती से लगभग 100 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त होता है। वहीं, खरबूज और तरबूज की खेती से 70 से 80 क्विंटल तक उपज मिल सकती है। फसलों का उचित उत्पादन और बाजार में बेहतर भाव मिलने पर उनकी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है।

लागत निकालने के बाद भी अच्छा मुनाफा-
जगदीश नागर के मुताबिक, यदि किसी फसल की उपज का न्यूनतम भाव 20 रुपए प्रति किलोग्राम भी मिलता है, तो उत्पादन के आधार पर एक फसल से लगभग डेढ़ लाख रुपए की सकल आय हो सकती है। इसमें करीब 50 हजार रुपए की लागत घटाने के बाद लगभग एक लाख रुपए का शुद्ध लाभ बच सकता है। इसी तरह साल में तीन फसलें लेकर वे एक बीघा जमीन से लगभग तीन लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ अर्जित करने का लक्ष्य हासिल कर रहे हैं।

हालांकि, वास्तविक कमाई उत्पादन, मौसम, बाजार भाव और खेती की लागत के अनुसार घट-बढ़ सकती है। इसके बावजूद उनका खेती का तरीका उन किसानों के लिए प्रेरणादायक है, जो सीमित जमीन में आमदनी बढ़ाने के विकल्प तलाश रहे हैं।

फसल विविधीकरण को मानते हैं सफलता की कुंजी-
किसान जगदीश जी का मानना है कि खेती में केवल परंपरागत फसलों पर निर्भर रहने के बजाय नई तकनीकों, उद्यानिकी और फसल विविधीकरण को अपनाना समय की जरूरत है। उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग, बाजार की मांग के अनुसार फसलों का चयन और साल में एक से अधिक फसलें लेना किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मददगार हो सकता है।

उन्होंने शासन की किसान हितैषी योजनाओं के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार भी व्यक्त किया। उनका कहना है कि मेहनत, सही योजना और खेती में नवाचार के जरिए किसान आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
खेती में नवाचार, उद्यानिकी फसलों के उत्पादन और बेहतर आमदनी अर्जित करने के लिए जगदीश नागर को देवास में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव एवं जिला स्तरीय कृषि मेले में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

उनका उदाहरण बताता है कि खेती को पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाकर व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

छोटे किसानों के लिए सीख: एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय मिट्टी, पानी, मौसम और बाजार की मांग के अनुरूप फसल विविधीकरण अपनाना आय बढ़ाने का उपयोगी विकल्प हो सकता है।

 

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