शिक्षक दिवस पर काली पट्टी बांधकर बोले शिक्षक- ‘ई-अटेंडेंस और दोबारा TET मंजूर नहीं’

संयुक्त मोर्चे के बैनर तले शासकीय शिक्षकों ने किया प्रदर्शन; कहा—वास्तविक उपस्थिति के आधार पर हो अटेंडेंस, वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर फिर TET की अनिवार्यता का फैसला वापस ले सरकार
देवास। शिक्षक दिवस पर एक ओर जहां शिक्षक सम्मानित किए जा रहे थे, वहीं देवास में शासकीय शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर अपनी नाराजगी जाहिर की। संयुक्त मोर्चे के बैनर तले शिक्षकों ने विद्यालयों में काली पट्टी बांधकर कार्य किया और बाद में एबी रोड स्थित मंडूक पुष्कर धरना स्थल पर एकत्र होकर ई-अटेंडेंस व्यवस्था और शासकीय सेवा में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी की पुनः अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन किया।
मोर्चा प्रवक्ता अरुण मिश्रा ने बताया कि शिक्षक दिवस के अवसर पर संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर शासकीय शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। इसके बाद शिक्षक मंडूक पुष्कर धरना स्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों का कहना है कि उनकी नाराजगी किसी एक व्यवस्था से नहीं, बल्कि ऐसी नीतियों से है जो जमीनी परिस्थितियों को नजरअंदाज कर शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ाती हैं।
‘तकनीक नहीं, वास्तविक उपस्थिति बने आधार’
प्रदर्शन के दौरान पुरुषोत्तम सिसोदिया ने कहा कि विद्यालय में शिक्षक की उपस्थिति का निर्धारण केवल तकनीकी माध्यम से नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए विद्यालयीन व्यवस्था और शिक्षक की वास्तविक उपस्थिति को आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और अन्य क्षेत्रों के विद्यालयों में कई तरह की व्यावहारिक परिस्थितियां होती हैं। ऐसे में ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने से पहले इन समस्याओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर फिर TET की अनिवार्यता का विरोध
शिक्षकों ने लंबे समय से शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा की पुनः अनिवार्यता के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। पुरुषोत्तम सिसोदिया ने कहा कि शिक्षक वर्षों से पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में उन पर दोबारा टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता लागू करने के प्रस्ताव पर शासन को पुनर्विचार करना चाहिए।
शिक्षकों ने रखी दो प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने शासन से मांग की कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था में आ रही व्यावहारिक समस्याओं की समीक्षा की जाए और इसे लागू करने से पहले जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए। साथ ही, लंबे समय से शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी की पुनः अनिवार्यता का निर्णय वापस लिया जाए। शिक्षकों ने कहा कि वे विद्यार्थियों के हित और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पूरी जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी वास्तविक समस्याओं और मांगों पर भी शासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
प्रदर्शन में साबिर शेख, अरुण मिश्रा, जितेंद्र मालवीय, धर्मवीर नरवरिया, डॉ. रजनीश पोरवाल, अर्जुनसिंह बैस, कमलसिंह चंद्रवंशी, राजेंद्र सूर्यवंशी, दिनेश निगम, हंसा चौधरी, लक्ष्मी माली, राजकुमारी सोलंकी, नीला रायकवार, सीमा चौधरी, निर्मला कटारिया, रागनी त्यागी, डिंपल यादव, रश्मि अवस्थी, संगीता त्रिवेदी, सुनीता ढालसे, ज्योति निगम सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।




