स्वास्थ्य

तीन माह की सेवा रंग लाई, लौटी याददाश्त… अमलतास अस्पताल ने मिलाया परिवार से

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◾अनजान युवक के लिए अमलतास अस्पताल बना परिवार, मुफ्त इलाज के साथ की निस्वार्थ देखभाल

◾Up का युवक न बोल पाता था, न नाम बता पाता था; चिकित्सकों और स्टॉफ की मेहनत से याददाश्त लौटी, परिवार की आंखों में छलके खुशी के आंसू

देवास। चिकित्सा केवल दवाइयों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसमें संवेदनाएं, धैर्य और मानवीय सेवा का भाव भी शामिल होता है। इसका जीवंत उदाहरण अमलतास अस्पताल के मनोरोग विभाग ने प्रस्तुत किया है।

अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने तीन माह तक एक ऐसे युवक की निस्वार्थ सेवा की, जो अपनी पहचान, परिवार और अतीत सब कुछ भूल चुका था। लगातार उपचार के परिणामस्वरूप युवक न केवल फिर से बोलने लगा, बल्कि अपने परिजनों तक भी पहुंच गया।

देवास स्थित अमलतास अस्पताल में लगभग तीन माह पूर्व करीब 32 वर्षीय एक युवक को भर्ती कराया गया था। उसकी मानसिक स्थिति ऐसी थी कि उसे अपना नाम, घर, गांव या परिवार के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वह न तो ठीक से बोल पा रहा था और न ही अपनी पहचान बता सकता था। ऐसी परिस्थिति में भी अमलतास अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने उसे एक मरीज नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह अपनाया।

स्किज़ोफ्रेनिया का इलाज, स्पीच थैरेपी और योग से मिला नया जीवन-
अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञों ने युवक का उपचार शुरू किया। उचित जांच कर पाया कि मरीज को स्किज़ोफ्रेनिया नामक बीमारी है। नियमित दवा देने के बाद उसमें अभूतपूर्व सुधार हुआ। उसे स्पीच थैरेपी, काउंसलिंग और योग जैसी गतिविधियों से जोड़ा गया। अस्पताल का पूरा स्टॉफ उसके साथ लगातार संवाद करने का प्रयास करता रहा। उसे ऐसा वातावरण दिया गया, जिससे उसे परिवार जैसा स्नेह और सुरक्षा का एहसास हो।

धीरे-धीरे युवक में बदलाव दिखाई देने लगा। अस्पताल से स्वस्थ होकर घर लौटने वाले मरीजों को देखकर उसके चेहरे पर भी मुस्कान आने लगी। चिकित्सकों ने समझ लिया कि उसकी स्मृतियां लौटने लगी हैं और उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी।

एक सही मोबाइल नंबर ने परिवार तक पहुंचा दिया
लगातार मानसिक उपचार, काउंसलिंग और धैर्यपूर्ण प्रयासों के दौरान युवक ने अपने परिजनों के मोबाइल नंबर बताने की कोशिश की, लेकिन वह हर बार दो-तीन अंक गलत बता देता था। इसके बावजूद कर्मचारियों ने हार नहीं मानी। उसके साथ संवाद जारी रखा।

आखिरकार एक दिन उसने अपने एक रिश्तेदार का सही मोबाइल नंबर बता दिया। इसके बाद अस्पताल की टीम तुरंत सक्रिय हुई और बताए गए नंबर पर संपर्क किया।

परिजनों ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रामपुर गांव का निवासी है। कुछ समय पहले परिवार उज्जैन आया था। इसी दौरान युवक रेलवे स्टेशन पर पानी पीने के लिए गया और फिर वापस नहीं लौटा। परिवार ने उसे हर संभव स्थान पर तलाशा, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी।

तीन महीने बाद भाई को देखकर छलक पड़े खुशी के आंसू-
परिवार को जब पता चला कि युवक देवास के अमलतास अस्पताल में सुरक्षित है, तो उसके भाई और अन्य परिजन तुरंत यहां पहुंचे। अस्पताल में युवक को सामने देखकर परिवार की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। युवक अब उन्हें पहचान रहा था और बातचीत भी कर पा रहा था।

युवक के भाई ने भावुक होकर कहा कि हमने उसे हर जगह तलाशा, लेकिन कहीं कोई जानकारी नहीं मिली। अमलतास अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने जिस सेवा भाव और समर्पण के साथ उसकी देखभाल की, उसी का परिणाम है कि आज हमारा भाई हमारे सामने खड़ा है और हमें पहचान रहा है।

अमलतास अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों की यह पहल केवल चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि मानवता का श्रेष्ठ उदाहरण है। जिस युवक को अपनी पहचान तक याद नहीं थी, उसे नई जिंदगी देकर उसके परिवार से मिलाने का कार्य वास्तव में सराहनीय है। तीन माह तक मानवीय संवेदनाओं के साथ किए गए प्रयासों ने साबित कर दिया कि जब चिकित्सा सेवा में इंसानियत जुड़ जाती है, तो चमत्कार संभव हो जाते हैं।

मानसिक रोग छिपाएं नहीं, समय पर कराएं इलाज : डॉ. आशुतोष भटेले
अमलतास सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष भटेले का कहना है कि मानसिक रोग भी शारीरिक रोग की तरह है। इसे सामाजिक बुराई ना समझे तथा बाबाओं की बातों पर विश्वास न करें। जिस तरह शारीरिक रोग का इलाज संभव है, उसी तरह मानसिक रोग का इलाज संभव है। समय समय पर इलाज एवं सही सलाह तथा देखभाल से मरीज की बीमारी बढ़ने से रोका जा सकता है एवं पूर्ण रूप से सही किया जा सकता है। इस सफलता में काउंसलर डॉ. ज्योति गोस्वामी एवं पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

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