खेत-खलियान

पाले की मार से फसल बचाने की पूरी गाइडलाइन, कृषि विभाग ने किसानों को दी जरूरी सलाह

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– खेत में धुआं करने से लेकर हल्की सिंचाई, रस्सी प्रयोग और रसायनों के छिड़काव तक के उपाय

देवास। जिले में कड़ाके की ठंड और साफ मौसम के बीच पाले का खतरा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में किसानों की मेहनत पर पानी न फिर जाए, इसके लिए कृषि विभाग अलर्ट मोड में है।

उप संचालक कृषि गोपेश पाठक ने पाले के कारण, उससे होने वाले नुकसान और बचाव के कारगर उपायों की विस्तृत जानकारी दी है। खेत में धुआं करने से लेकर हल्की सिंचाई, रस्सी प्रयोग और रसायनों के सुरक्षित छिड़काव तक- जानिए वे सभी उपाय, जिनसे किसान अपनी फसलों को पाले की मार से सुरक्षित रख सकते हैं।

उप संचालक ने बताया कि पाला का पूर्वानुमान जिस दिन आकाश पूर्णतया साफ हो, वायु में नमी की अधिकता हो‌, कड़ाके की सर्दी हो, सायंकाल के समय हवा में तापमान ज्यादा कम हो एवं भूमि का तापमान शून्य डिग्री सेंटीग्रेड अथवा इससे कम हो जाए, ऐसी स्थिति में हवा में विद्यमान नमी जल वाष्प संघनीकृत होकर ठोस अवस्था में (बर्फ) परिवर्तित हो जाती है। साथ ही पौधों की पत्तियों में विद्यमान जल संघनित होकर बर्फ के कण के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं जिससे पत्तियों की कोशिका भित्ती क्षतिग्रस्त हो जाती है जिससे पौधों की जीवन प्रक्रिया के साथ-साथ उत्पादन भी प्रभावित होता है।

पाला से बचाव के उपाय-
पाले की संभावना पर रात में खेत में 6-8 जगह पर धुआं करना चाहिए। यह धुआं खेत में पड़े घास-फूस अथवा पत्तियां जलाकर भी किया जा सकता है। यह प्रयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि धुआं सारे खेत में छा जाए तथा खेत के आसपास का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक आ जाए। इस प्रकार धुआं करने से फसल का पाले से बचाव किया जा सकता है। पाले की संभावना होने पर खेत की हल्की सिंचाई कर देना चाहिए। इससे मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है तथा नुकसान की मात्रा कम हो जाती है। सिंचाई बहुत ज्यादा नहीं करनी चाहिए तथा इतनी ही करनी चाहिए जिससे खेत गीला हो जाए। स्प्रिंकलर चलाए तो बेहतर होगा।

रस्सी का उपयोग भी पाले से काफी सुरक्षा प्रदान करता है। इसके लिये दो व्यक्ति सुबह-सुबह एक लंबी रस्सी को उसके दोनों सिरों से पकड़ कर खेत के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक फसल को हिलाते चले। इससे फसल पर रात का जमा पानी गिर जाता है तथा फसल की पाले से सुरक्षा हो जाती है।

रसायन से पाला नियंत्रण-
घुलनशील सल्फर 0.3 से 0.5 प्रतिशत् का घोल (3 से 5 एम.एल./ली. पानी के साथ) घुलनशील सल्फर 0.3 से 0.5 प्रतिशत बोरान 0.1 प्रतिशत घोल (3 से 5 एम.एल./ली. +1 एम.एल. पानी के साथ) गंधक के एक लीटर तेजाब को 1000 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कने से लगभग दो सप्ताह तक फसल पाले के प्रकोप से बचाया जा सकता है।

रसायनों विशेषतया गंधक के तेजाब का उपयोग अत्यंत सावधानीपूर्वक तथा किसी कृषि विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिये। उपरोक्त में से कोई भी एक घोल बनाकर छिड़काव करके फसल को पाले से बचाया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिये आपके क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी/कृषि विस्तार अधिकारी एवं तकनीकी सलाह के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क करें।

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