खेत-खलियान

रासायनिक खेती बन रही धरती के लिए घातक, जैविक खेती ही भविष्य की आवश्यकता- हुकुम पाटीदार

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देवास। किसानों की बढ़ती लागत, घटती पैदावार और स्वास्थ्य पर पड़ते दुष्प्रभावों को लेकर जैविक खेती की आवश्यकता पर जोर देते हुए अखिल भारतीय जैविक प्रमुख एवं पद्मश्री सम्मानित हुकुम पाटीदार ने कहा कि रासायनिक खेती ने धरती की उर्वरता को नुकसान पहुंचाया है। यदि समय रहते जैविक पद्धति नहीं अपनाई गई, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।

भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय जैविक प्रमुख पद्मश्री हुकुम पाटीदार का जिले में प्रवास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कृषि उपज मंडी क्रमांक-1 में भगवान बलरामजी के पूजन के साथ जिला स्तरीय बैठक की शुरुआत हुई। बैठक में जिला एवं तहसील स्तर के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का पारंपरिक रूप से तिलक लगाकर एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया गया।

अपने संबोधन में हुकुम पाटीदार ने कहा कि हरित क्रांति के दौर में उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग किया गया। उस समय यह आवश्यक था, लेकिन आज वही रसायन भूमि को जहरीला बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक खेती से मिट्टी की उर्वरता घटती जा रही है, जिससे उत्पादन कम हो रहा है और किसान की लागत बढ़ती जा रही है। परिणामस्वरूप किसान आर्थिक संकट में फंसता जा रहा है।

उन्होंने चेताया कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। गांव-गांव में कैंसर, लकवा, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का बढ़ना इसी का परिणाम है। इसलिए अब समय आ गया है कि किसान रासायनिक खेती छोड़कर गो-आधारित जैविक खेती को अपनाएं, जिससे भूमि, पर्यावरण और मानव तीनों सुरक्षित रह सकें।

पाटीदार ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे, न कि बड़े कॉर्पोरेट घरानों तक। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 23 हजार रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी किसानों के नाम पर दी जाती है, लेकिन उसका वास्तविक लाभ किसानों को नहीं मिल पाता। इस व्यवस्था में सुधार आवश्यक है।

बैठक में प्रांत सदस्य रामप्रसाद सूर्या ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाए और भूमि के रकबे के आधार पर ही सब्सिडी तय की जाए। वहीं प्रांत सह संगठन मंत्री दिनेश शर्मा ने भी जैविक खेती को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

इस अवसर पर प्रांत प्रचार प्रमुख गोवर्धन पाटीदार, जिला प्रभारी आनंद आंजना, संभागीय सहमंत्री बहादुर सिंह राजपूत, जिला अध्यक्ष हुकुमचंद पटेल, जिला मंत्री शेखर पटेल सहित तहसील स्तर के पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के पश्चात सभी ने मां चामुंडा के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

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