धर्म-अध्यात्म

बेटी के न्यायाधीश बनने पर खाटू श्याम के दर पर पैदल निकले शोभाराम

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भौंरासा (मनोज शुक्ला)। एक पिता की मन्नत, एक बेटी की मेहनत और एक परिवार का सपना—यह कहानी है रतलाम जिले के ग्राम कापरी के शोभाराम पाठक की, जो एक रिटायर्ड फौजी हैं और अपनी बेटी के न्यायाधीश बनने की खुशी में बाबा खाटू श्याम के दरबार में पैदल निशान लेकर निकल पड़े हैं।

भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके शोभाराम पाठक ने वर्षों पहले खाटू श्याम बाबा से एक मन्नत मांगी थी “जिस दिन मेरी बेटी जज बनेगी, उस दिन मैं उसके पहले पोस्टिंग स्थल से बाबा के दरबार तक पैदल यात्रा करूंगा।” अब जब यह मन्नत पूरी हुई, बेटी ज्योति पाठक जबलपुर हाईकोर्ट में न्यायाधीश बनीं, तो वह 650 किलोमीटर लंबी पदयात्रा पर निकल पड़े।

गुरुवार को शोभाराम पाठक भौंरासा पहुंचे, जहां उन्होंने प्राचीन बाबा भंवरनाथ मंदिर में रात्रि विश्राम कर शुक्रवार सुबह पंचमुखी हनुमान मंदिर से यात्रा प्रारंभ की। सुनील कुमावत, अनिल कुमावत, मनीष राठौर, नवीन डोडिया, अभय नागर, मनोज शुक्ला व नगरवासियों ने पीरू पहलवान होटल पर पुष्पहार पहनाकर उनका स्वागत किया।

शोभाराम पाठक सिर्फ एक पिता ही नहीं, एक प्रेरणा भी हैं। वे एक किसान परिवार से आते हैं, आदिवासी समाज से संबंध रखते हैं और सेना में जम्मू-कश्मीर जैसे दुर्गम क्षेत्र में देश सेवा कर चुके हैं। 2012 में रिटायरमेंट के बाद वे खेती में लग गए, लेकिन अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। उनके परिवार की चार बेटियां और एक बेटा सभी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। एक बेटी जज हैं, एक बेटी भागवत कथा करती हैं, एक बेटी डॉक्टर हैं, जबकि बेटा राहुल सेना में पदस्थ है।

उन्होंने भावुक होकर कहा मेरी चारों बेटियां मेरे लिए चार दीपक हैं, जो अब अपने-अपने क्षेत्र में रौशनी फैला रही हैं। मैं चाहता हूं कि मेरी यह पदयात्रा एक संदेश बने, हर बेटी को मौका मिलना चाहिए उड़ान भरने का, और हर पिता को गर्व होना चाहिए उसकी कामयाबी पर।

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