
अलीना बोलीं- क्रिकेट में बहुत स्कोप है, मेहनत करें और हार मानकर खेलना न छोड़ें
देवास। कहते हैं, पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते हैं। इस कहावत को चरितार्थ किया है देवास की नन्ही क्रिकेटर अलीना खान ने। महज 14 साल की उम्र में अलीना ने अपने खेल और मेहनत के दम पर ऐसी पहचान बनाई है कि अब उनका चयन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की चैलेंजर ट्रॉफी के लिए हुआ है।
मैदान पर रोजाना 9 से 10 घंटे तक पसीना बहाने वाली अलीना के लिए यह मुकाम एक दिन की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और क्रिकेट के प्रति जुनून का परिणाम है। अलीना का कहना है ‘मुझे क्रिकेट में ही आगे बढ़ना है, तो परफॉर्म करना पड़ेगा’
अलीना की क्रिकेट यात्रा छोटी उम्र में ही शुरू हो गई थी। पांच-छह साल की उम्र में घर के बाहर खेलते हुए उनके हुनर को मोहल्ले के लोगों ने पहचान लिया था। इसके बाद पिता ने उन्हें क्रिकेट एकेडमी में दाखिला दिलाया। छह-सात साल की उम्र से ही उन्होंने देवास जिला क्रिकेट एसोसिएशन के साथ नियमित अभ्यास शुरू कर दिया। आज वही नन्ही खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तैयार है। तो आइये, विशेष चर्चा में अलीना से ही जानते हैं उनके क्रिकेट के इस रोमांचक सफर के बारे में….।
सवाल : अलीना, क्रिकेट की शुरुआत कैसे हुई और इस खेल में आगे बढ़ने का जुनून कब आया?
अलीना : सात साल की उम्र में जब शुरुआत की थी, तब सुबह स्कूल जाना पड़ता था। दोपहर तीन बजे स्कूल से आने के बाद खाना खाते थे और फिर चार बजे तक ग्राउंड पहुंच जाते थे। वहां शाम सात बजे तक प्रैक्टिस करते थे। धीरे-धीरे क्रिकेट के प्रति लगाव बढ़ता गया और अब इसी में आगे बढ़ना है।
सवाल : अभी आपकी प्रैक्टिस का रूटीन कैसा है?
अलीना : अभी सुबह सात बजे ग्राउंड पर आ जाते हैं। यहां 12 से एक बजे तक प्रैक्टिस करते हैं। फिर दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक ग्राउंड पर अभ्यास करते हैं। पढ़ाई भी करनी होती है, इसलिए शाम सात से नौ बजे के बीच पढ़ाई करती हूं। इस साल मैं नौवीं कक्षा में हूं। फिलहाल क्रिकेट के लिए स्कूल की पढ़ाई भी घर पर ही चल रही है।
सवाल : इतनी कम उम्र में बड़े खिलाड़ियों के साथ खेलने पर कैसा लगता है?
अलीना : बड़ों के साथ खेलते समय ऐसा फील नहीं होता कि हम छोटे हैं। हमें सभी का सहयोग मिलता है। अरुण सर ने हमें छोटी उम्र से सिखाया है। वे हमारा ख्याल रखते हैं और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
सवाल : अब आगे कहां खेलने जाना है और आपका लक्ष्य क्या है?
अलीना : अभी हम हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जाएंगे, जहां सेंट्रल जोन के मैच होंगे। मुझे क्रिकेट में ही आगे बढ़ना है, तो परफॉर्म करना पड़ेगा और उसके लिए मेहनत भी कर रही हूं।
सवाल : अपनी उम्र की दूसरी लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
अलीना : लगन से मेहनत करें और प्रैक्टिस करें। क्रिकेट में बहुत स्कोप है। हार मानकर इस खेल को छोड़ना नहीं चाहिए।
मैदान पर 9-10 घंटे की मेहनत ने निखारा हुनर
अलीना की इस सफलता के पीछे रोजाना मैदान पर बिताए जाने वाले लंबे घंटे और खेल के प्रति उनका अनुशासन है। सुबह सात बजे से दोपहर 12-1 बजे तक अभ्यास और फिर शाम तीन से सात बजे तक मैदान पर पसीना बहाना हर किसी के बस की बात नहीं है। क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए अलीना ने छोटी उम्र से ही अपनी दिनचर्या को इसी तरह ढाला है।
देवास जिला क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव अरुण रघुवंशी बताते हैं कि क्रिकेट में अनुशासन बेहद जरूरी है। अलीना में नियमित रूप से समय पर मैदान पहुंचने, मेहनत करने, कोच की बात सुनने और नियमों का पालन करने जैसी सभी खूबियां हैं। वह लगातार अभ्यास करती आ रही हैं। मैदान पर नौ से दस घंटे बिताना आसान नहीं है, लेकिन अलीना ने अपनी मेहनत से यह कर दिखाया है।
रघुवंशी के अनुसार, क्रिकेट ऐसा खेल है, जिसमें जितनी अधिक मेहनत की जाती है, कामयाबी की संभावनाएं उतनी ही बढ़ती हैं। इस खेल में नाम, पहचान और आर्थिक सफलता के अवसर भी हैं, लेकिन इसके लिए मैदान पर पसीना बहाना पड़ता है। अलीना की उपलब्धि इसका अच्छा उदाहरण है।
अंडर-18 में 13 विकेट लेकर खींचा चयनकर्ताओं का ध्यान
अलीना का चयन बीसीसीआई की चैलेंजर ट्रॉफी के लिए हुआ है। देशभर से चुनी गई 60 महिला क्रिकेटरों को प्रतियोगिता में चार समूहों में बांटा जाएगा। मध्यप्रदेश से चयनित दो खिलाड़ियों में अलीना भी शामिल हैं। देवास की इस खिलाड़ी के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि वह जिले से इस प्रतियोगिता के लिए चयनित एकमात्र खिलाड़ी हैं।
उल्लेखनीय है कि अलीना ने त्रिवेंद्रम में अंडर-18 वर्ग में मध्यप्रदेश की ओर से खेलते हुए 13 विकेट हासिल किए थे। इस प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। खास बात यह है कि अलीना अभी अंडर-14 आयु वर्ग में खेल रही हैं, लेकिन अपने प्रदर्शन के दम पर उन्हें बड़ी उम्र की खिलाड़ियों के साथ खेलने के अवसर भी मिल रहे हैं। चैलेंजर ट्रॉफी उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित करने और क्रिकेट में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण अवसर होगी।
15 लड़कियों से शुरू हुआ सफर, अब 166 खिलाड़ी कर रहीं अभ्यास
देवास में महिला क्रिकेट की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। जिला क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव अरुण रघुवंशी बताते हैं कि उस समय अलीना महज छह साल की थीं और उन्होंने तभी से क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। शुरुआत में अभ्यास के लिए केवल 15 लड़कियां आती थीं, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 166 हो गई है।
अलीना की सफलता ने दूसरी लड़कियों को भी क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। नियमित अभ्यास और बेहतर प्रदर्शन के दम पर उन्होंने यह साबित किया है कि छोटी उम्र में भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन पर देवास के क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें रहेंगी।


