खेत-खलियान

भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव

ओलावृष्टि राहत, फसल बीमा और सिंचाई योजनाओं समेत कई मुद्दों को लेकर पहुंचे थे किसान

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– कलेक्टर ने चार मांगों पर दिया समाधान का भरोसा

देवास। फसल नुकसान की राहत राशि से लेकर सिंचाई योजनाओं और फसल बीमा की विसंगतियों तक कई मांगों को लेकर बुधवार को भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में जिलेभर के किसान देवास कलेक्ट्रेट पहुंचे।

दोपहर तक अधिकारियों से चर्चा नहीं होने पर किसानों का आक्रोश बढ़ गया और उन्होंने कलेक्टर कार्यालय के मुख्य गेट पर ही धरना शुरू कर दिया। शाम करीब 6 बजे कलेक्टर धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों से उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने चार प्रमुख मांगों के समाधान का आश्वासन दिया।

भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में उदयनगर, विजयागंज मंडी, खातेगांव, कन्नौद, बागली और हाटपिपल्या सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। किसानों का कहना था कि वे अपनी समस्याओं को लेकर अधिकारियों से चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन दोपहर 3 बजे तक कोई अधिकारी बातचीत के लिए नहीं पहुंचा।

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इसके बाद किसानों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद एडीएम शोभाराम सोलंकी किसानों के बीच पहुंचे और मांग पत्र लिया। इसके बाद शाम को कलेक्टर भी धरना स्थल पर पहुंचे।

कलेक्टर ने चार मांगों पर दिया समाधान का भरोसा-
किसानों ने कलेक्टर के सामने फसल नुकसान, फसल बीमा, सिंचाई और राजस्व से जुड़ी समस्याएं रखीं। चर्चा के दौरान कलेक्टर ने बताया कि 27 जनवरी की ओलावृष्टि से हुए नुकसान के लिए करीब 20 करोड़ रुपए की राहत राशि मंजूर हो चुकी है। किसानों को बताया गया कि यह राशि एक-दो दिन में उनके खातों में वितरित की जाएगी। 

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इसके अलावा जिले के 11 गांवों में बंदोबस्त की कार्रवाई कराने, हाटपिपल्या सिंचाई योजना का काम जल्द शुरू कराने और फसल बीमा से जुड़ी समस्याओं को प्रदेश स्तर पर उठाकर समाधान कराने का आश्वासन भी दिया गया।

फसल बीमा में विसंगतियों का मुद्दा भी उठा-
किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्ष 2024 और 2025 के दावों का दोबारा निष्पक्ष आकलन कराने की मांग की। भारतीय किसान संघ का कहना है कि वास्तविक नुकसान के आधार पर किसानों को बीमा राशि मिलनी चाहिए।

किसानों ने फसल कटाई प्रयोग यानी CCE के आंकड़ों को आधार बनाने की मांग करते हुए सैटेलाइट आधारित आकलन और जमीनी स्थिति के बीच अंतर की समीक्षा करने की बात भी रखी।

सिंचाई योजनाओं की धीमी रफ्तार पर नाराजगी-
किसानों ने नर्मदा-कालीसिंध सिंचाई योजना के निर्माण में हो रही देरी और काम की गुणवत्ता की जांच की मांग की। वहीं हाटपिपल्या सिंचाई योजना का काम तीन साल बाद भी शुरू नहीं होने पर नाराजगी जताई गई। 

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किसानों ने मांग की कि योजना का काम जल्द शुरू कराया जाए और निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए, ताकि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिल सके।

जंगली जानवरों से फसलों को हो रहा नुकसान-
धरने के दौरान किसानों ने जंगली सूअर, नीलगाय (रोजड़ा), हिरण और बंदरों से फसलों को हो रहे नुकसान की समस्या भी उठाई। किसानों का कहना है कि लगातार फसल नुकसान के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उन्होंने जंगली जानवरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने और उन्हें सुरक्षित तरीके से बड़े जंगलों में छोड़े जाने की मांग की।

राजस्व रिकॉर्ड और दूध के भाव को लेकर भी मांग-
किसानों ने कई गांवों में राजस्व नक्शे, दर्ज रकबे और मौके पर किसानों के कब्जे वाली भूमि में विसंगतियों का मुद्दा उठाया। इसके लिए विशेष राजस्व शिविर लगाने की मांग की गई। 

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इसके साथ ही पशुपालन की बढ़ती लागत को देखते हुए किसानों ने दूध का भाव 12 रुपए प्रति फैट निर्धारित करने की मांग भी रखी।

बंद हुए रास्तों के लिए वैकल्पिक मार्ग की मांग-
इंदौर-बैतूल फोरलेन और बुधनी-इंदौर रेल लाइन निर्माण के कारण बंद हुए किसानों के पारंपरिक रास्तों का सर्वे कराकर वैकल्पिक और स्थायी रास्ते उपलब्ध कराने की मांग की गई।

किसानों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और लोक निर्माण विभाग की क्षतिग्रस्त ग्रामीण सड़कों की मरम्मत व पुनर्निर्माण, अतिक्रमण हटाने और जल निकासी की समस्याओं के निराकरण की मांग भी रखी।

किसान नेताओं ने धरने को किया संबोधित-
धरने को भारतीय किसान संघ के प्रांत सदस्य रामप्रसाद सूर्या, प्रचार प्रमुख गोवर्धन पाटीदार, संभागीय सहमंत्री बहादुर सिंह राजपूत, संभागीय सदस्य रामनिवास केरेपा, जिला अध्यक्ष हुकमचंद पटेल, कन्नौद जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश टाडी, जिला मंत्री शेखर पटेल और गोरेलाल गुर्जर ने संबोधित किया। कार्यक्रम की जानकारी जिला प्रचार प्रमुख राकेश जाट ने दी।

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