भाइयों ने बहनों को पानी में लगवाई पांच डुबकियां, फिर लिया जिंदगीभर रक्षा का संकल्प
सातुड़ी तीज पर अनोखी परंपरा निभाने नदी पहुंचीं बहनें, भाइयों ने भी लगाई डुबकी

– शिव-पार्वती और नीम माता की पूजा कर महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत
बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प की अनूठी परंपरा सोमवार को बेहरी क्षेत्र में देखने को मिली। सातुड़ी तीज के अवसर पर भाई अपनी बहनों को गुनेरा-गुनेरी नदी में पांच बार डुबकी लगवाने पहुंचे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस परंपरा के माध्यम से भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। अच्छी बारिश के कारण इस वर्ष नदी में पर्याप्त पानी होने से पर्व का उत्साह भी नजर आया।
क्षेत्र में सातुड़ी तीज का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखा। महिलाओं ने भगवान शिव-पार्वती और नीम माता (कजली माता) की विधि-विधान से पूजा की। पूजा में सत्तू, फल और मिठाइयां अर्पित की गईं।
सातू माता को सिर पर धारण कर निकलीं महिलाएं-
पर्व को लेकर महिलाओं ने विशेष तैयारी की। सोलह श्रृंगार कर और हाथ-पैरों में मेहंदी सजाकर महिलाएं नए एवं आकर्षक वस्त्रों में शामिल हुईं। सिर पर सातू माता को धारण कर महिलाएं मंगल गीत गाते हुए नगर भ्रमण करती हुईं गुनेरा-गुनेरी नदी पहुंचीं।
नदी तट पर पं. अंतिम उपाध्याय ने पूजा-पाठ संपन्न कराया और व्रतधारी महिलाओं का उद्यापन करवाया। इस दौरान महिलाओं ने व्रत कथा सुनी और पारंपरिक कजरी लोकगीत गाकर पर्व की परंपराओं को जीवंत किया।
चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला व्रत-
दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद महिलाओं ने शाम को चंद्रमा के उदय होने की प्रतीक्षा की। चंद्रमा के दर्शन के बाद कच्चे दूध और जल से अर्घ्य दिया। इसके पश्चात महिलाओं ने व्रत खोला।
पांच डुबकियों के पीछे भाई-बहन के रिश्ते की मान्यता-
पं. अंतिम उपाध्याय ने बताया कि सातुड़ी तीज भाई-बहन के प्रेम और आपसी विश्वास से जुड़ा पर्व है। इस दिन भाई अपनी बहनों को नजदीकी तालाब या नदी में पांच बार पानी में डुबकी लगवाते हैं और उनकी रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। यही परंपरा इस पर्व को क्षेत्र के अन्य त्योहारों से अलग पहचान देती है।
इस वर्ष अच्छी बारिश के चलते बेहरी से निकली गुनेरी नदी में पर्याप्त पानी रहा। ऐसे में पर्व की पारंपरिक रस्म के लिए नदी तट पर पहुंचे भाइयों और बहनों में खास उत्साह नजर आया। भाइयों ने बहनों के साथ स्वयं भी पानी में डुबकी लगाई और उनकी रक्षा का संकल्प दोहराया। धार्मिक आस्था, लोकपरंपरा और भाई-बहन के स्नेह का यह दृश्य पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र रहा।




