स्वास्थ्य

बार-बार छींक, नाक बहना और एलर्जी से हैं परेशान? जानिए एलर्जिक राइनाइटिस का होम्योपैथी से प्रबंधन

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धूल, परागकण, धुआं और मौसम परिवर्तन हैं प्रमुख कारण; विशेषज्ञ डॉ. योगेन्द्र सिंह भदौरिया ने बताए लक्षण, बचाव और होम्योपैथिक उपचार की भूमिका

देवास। बार-बार छींक आना, नाक बहना, नाक बंद रहना या आंखों में खुजली जैसी समस्याएं यदि लगातार बनी रहती हैं, तो इन्हें सामान्य जुकाम समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अमलतास इंस्टिट्यूट ऑफ होम्योपैथी के प्राचार्य एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. योगेन्द्र सिंह भदौरिया के अनुसार, ये एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि समय पर चिकित्सकीय परामर्श, बचाव के उपाय और रोगी की स्थिति के अनुसार होम्योपैथिक उपचार से इस समस्या का प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है।

एलर्जिक राइनाइटिस नाक की एक सामान्य एलर्जी संबंधी समस्या है। यह धूल, परागकण (Pollen), धुआं, फफूंद, पालतू जानवरों के बाल अथवा अन्य एलर्जन के संपर्क में आने से उत्पन्न होती है। वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण एवं बदलती जीवनशैली के कारण यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।

इसके प्रमुख लक्षण के बारे में उन्होंने बताया बार-बार छींक आना, नाक से पानी जैसा स्राव होना, नाक बंद रहना, नाक, गले एवं आंखों में खुजली, आंखों से पानी आना सिरदर्द एवं थकान आदि हैं। मौसम बदलने पर लक्षण बढ़ जाते हैं।

डॉ. भदौरिया का कहना है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) किसी सामान्य पदार्थ को हानिकारक समझकर उसके विरुद्ध अत्यधिक प्रतिक्रिया करने लगती है, तब एलर्जिक राइनाइटिस उत्पन्न होती है। धूल, धुआं, परागकण, पालतू पशुओं के बाल एवं मौसम परिवर्तन इसके प्रमुख कारण हैं।

बचाव के उपाय –
– घर एवं कार्यस्थल को स्वच्छ एवं धूल-मुक्त रखें।
– धूम्रपान एवं प्रदूषित वातावरण से बचें।
– बाहर जाते समय मास्क का उपयोग करें।
– बिस्तर, तकिए एवं पर्दों की नियमित सफाई करें।
– एलर्जी उत्पन्न करने वाले कारणों की पहचान कर उनसे दूरी बनाएं।

होम्योपैथी की भूमिका-
उन्होंने बताया कि होम्योपैथी में एलर्जिक राइनाइटिस का उपचार केवल लक्षणों को दबाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि रोगी की संपूर्ण शारीरिक एवं मानसिक प्रकृति, एलर्जी की प्रवृत्ति तथा रोग के मूल कारणों को ध्यान में रखकर किया जाता है। उचित होम्योपैथिक उपचार से छींक, नाक बहना, नाक बंद होना तथा बार-बार होने वाले एलर्जी के दौरे कम करने में सहायता मिल सकती है।

डॉ. भदौरिया ने बताया कि रोगी के लक्षणों के अनुसार विभिन्न होम्योपैथिक औषधियों का चयन किया जाता है। चूंकि प्रत्येक रोगी की प्रकृति एवं लक्षण अलग-अलग होते हैं, इसलिए दवा का चयन योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह से ही किया जाना चाहिए।

डॉ. भदौरिया के अनुसार, “एलर्जिक राइनाइटिस को सामान्य जुकाम समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि समय पर उचित उपचार न मिले तो यह साइनुसाइटिस, कान के संक्रमण एवं अस्थमा जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। होम्योपैथी में रोगी-विशिष्ट उपचार के माध्यम से एलर्जी की पुनरावृत्ति को कम किया जाता है तथा रोगी के जीवन को रोग मुक्त किया जा सकता है

उन्होंने कहा कि बार-बार छींक आना, नाक बहना अथवा नाक बंद रहना जैसी समस्याओं को हल्के में न लें। समय पर चिकित्सकीय परामर्श, उचित बचाव एवं होम्योपैथिक उपचार के माध्यम से एलर्जिक राइनाइटिस का प्रभावी प्रबंधन संभव है।

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