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दो बार बोवनी के बाद भी नहीं उगी सोयाबीन! बीज पानी में हुआ खराब, किसानों पर तीसरी बोवनी का संकट

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बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने बेहरी क्षेत्र के किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। क्षेत्र में करीब 200 बीघा में बोई गई सोयाबीन की फसल अधिक वर्षा और जलभराव के कारण पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

हालात इतने खराब हैं कि कई किसानों ने पहली फसल खराब होने के बाद दोबारा बोवनी की, लेकिन दूसरी बार भी बीज अंकुरित नहीं हो सके। अब किसानों के सामने तीसरी बार बोवनी करने का संकट खड़ा हो गया है। आर्थिक तंगी के बीच किसान प्रशासन से सर्वे और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

लगातार बारिश से खेत बने तालाब, बीज पानी में सड़ गए
पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण निचले इलाकों के खेतों में पानी भर गया। कई खेत तालाब जैसे नजर आने लगे। लंबे समय तक जलभराव रहने से सोयाबीन के बीज मिट्टी के अंदर ही सड़ गए और पौधे जमीन से बाहर नहीं निकल पाए। जिन किसानों ने समय पर बोवनी की थी, उनकी पूरी मेहनत पानी में बह गई।

डबल बोवनी के बाद भी नहीं हुआ अंकुरण
पहली बोवनी खराब होने पर किसानों ने अतिरिक्त खर्च उठाकर दोबारा बीज खरीदे और फिर से बोवनी की। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार फसल बच जाएगी, लेकिन लगातार बारिश ने दूसरी बार की बोवनी भी खराब कर दी। बीज मिट्टी में ही सड़ गए और अंकुरण नहीं हो सका। इससे किसानों की लागत दोगुनी हो गई, जबकि खेत अब भी खाली पड़े हैं।

“अब तीसरी बार बोवनी करें तो पैसा कहां से लाएं?”
प्रभावित किसानों का कहना है कि उन्होंने बीज, खाद और दवाइयों के लिए कर्ज लेकर खेती की थी। पहली और दूसरी बोवनी दोनों खराब होने से आर्थिक संकट गहरा गया है। किसानों का कहना है कि यदि अब तीसरी बार बोवनी करनी पड़ी तो उसके लिए पैसा जुटाना मुश्किल होगा।
एक किसान ने बताया, “दो बार बोवनी करने के बाद भी फसल नहीं निकली। अब तीसरी बार बोवनी करें तो पैसा कहां से लाएं? पहले से लिया कर्ज कैसे चुकाएंगे, यही सबसे बड़ी चिंता है।”

सोयाबीन ही है किसानों की मुख्य फसल
बेहरी क्षेत्र के अधिकांश किसान खरीफ सीजन में सोयाबीन पर ही निर्भर रहते हैं। बीज, खाद और कीटनाशक पर हजारों रुपये खर्च करने के बाद यदि फसल तैयार ही नहीं होगी तो किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा। लगातार हो रही बारिश से किसानों की चिंता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

200 बीघा से अधिक क्षेत्र प्रभावित, बढ़ सकता है नुकसान
ग्रामीणों के अनुसार बेहरी क्षेत्र में करीब 200 बीघा से अधिक भूमि पर सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई है। कई खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है। यदि बारिश का दौर इसी तरह जारी रहा तो नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है।

प्रशासन से सर्वे और मुआवजे की मांग
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित खेतों का तत्काल सर्वे कराया जाए और जिन किसानों की फसल नष्ट हुई है, उन्हें शासन की नियमानुसार राहत राशि और उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि समय रहते सहायता नहीं मिली तो उनके सामने खेती जारी रखना भी कठिन हो जाएगा।

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