देवास

अहिल्याबाई होल्कर का जीवन सुशासन और लोककल्याण का आदर्श- श्री सेन

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देवास। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती के अवसर पर रामनगर चौराहा पर संस्था देशराग के बैनर तले एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों तथा गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं नेता सत्ता पक्ष मनीष सेन ने अपने उद्बोधन में कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन पर जितना प्रकाश डाला जाए उतना कम है। उन्होंने अपने जीवन में धर्म, संस्कृति, सुशासन, लोककल्याण एवं समाज सेवा के ऐसे आदर्श स्थापित किए जो आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई केवल एक सफल शासक ही नहीं थीं, बल्कि जनता के प्रति समर्पण, न्यायप्रियता और सेवा भाव के कारण वे जन-जन की लोकमाता बन गईं।

इस अवसर पर संस्था देशराग के संयोजक विजय गहलोत ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय इतिहास में उनके द्वारा किए गए जनकल्याणकारी कार्यों का विशेष महत्व है। उन्होंने देशभर में मंदिरों, घाटों, धर्मशालाओं, कुओं एवं जनसुविधाओं के निर्माण के माध्यम से समाज सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका शासन जनहित, न्याय और लोककल्याण की भावना पर आधारित था। गहलोत ने कहा कि लोकमाता के कार्यों की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी और आज भी उनका जीवन राष्ट्र निर्माण, महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक समरसता के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

कार्यक्रम में संस्था देशराग के रमाकांत सिंह बघेल, राजेश गुप्ता, वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश चौधरी, कमल चौधरी, विजय चौधरी, राजेंद्र चौधरी, माखन सिंह राठौड़, शैलेंद्र सिंह गौड़, भाजपा नेता अर्जुन चौधरी, बृजेश परमार, अभिषेक ठाकुर, चेतन चौधरी, मनोज चौधरी, संजू चौधरी, विक्रम चौधरी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त सिख समाज के प्रमुख गुरचरण सिंह गंभीर, अधिवक्ता साथियों तथा विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं जातीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में सहभागिता कर लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों को नमन किया। कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों एवं विभिन्न जातियों के नागरिकों की सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिली।

अंत में लोकमाता विचार मंच के संयोजक सुरेश चौधरी ने सभी अतिथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने तथा उनके बताए मार्ग पर चलने के संकल्प के साथ हुआ। ये भी पढ़ें: लोकमाता देवी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती वर्ष पर संगोष्ठी 

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