सोयाबीन में इल्लियों का बढ़ा प्रकोप, फलियों और तनों को पहुंचा रहीं नुकसान

– किसान कर रहे कीटनाशक का छिड़काव
सिरोल्या (अमर चौधरी)। खरीफ सीजन में खेतों में सोयाबीन और मक्का की फसल अब महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंच गई है। करीब दो माह की हो चुकी सोयाबीन की फसल में फूल आने के बाद अब फलियां बनने का दौर चल रहा है। ऐसे समय में फसल पर इल्लियों का प्रकोप बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई खेतों में हरी और काली इल्लियां सोयाबीन की पत्तियों के साथ-साथ फलियों और तनों को भी नुकसान पहुंचा रही हैं।
फसल को कीटों से बचाने के लिए क्षेत्र के किसान खेतों में कीटनाशक का छिड़काव कर रहे हैं। कई किसानों ने दूसरी बार फसल पर दवा का छिड़काव शुरू किया है। कोई किसान हाथ से चलने वाले पम्प के माध्यम से दवा का छिड़काव कर रहा है, तो कहीं ट्रैक्टर से संचालित मशीन के पम्प से बड़े खेतों में कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है।
फलियां बनने के समय इल्लियों ने बढ़ाई चिंता-
सोयाबीन इस समय उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण अवस्था में है। पौधों पर फलियां दिखाई देने लगी हैं और धीरे-धीरे उनमें दाना विकसित हो रहा है। ऐसे समय पत्तियों और फलियों को नुकसान पहुंचाने वाली इल्लियां किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। किसानों का कहना है कि यदि इस अवस्था में कीटों का प्रकोप नियंत्रित नहीं हुआ तो फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
खेतों में किसान लगातार फसल की निगरानी कर रहे हैं। कहीं-कहीं पौधों पर इल्लियां दिखाई देने के बाद तत्काल कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। किसानों का पूरा ध्यान अब फसल को सुरक्षित रखते हुए फलियों में अच्छी तरह दाना भरने पर है।
मक्का में भी भुट्टे को नुकसान-
सोयाबीन के साथ मक्का की फसल भी अब दाना बनने की अवस्था में पहुंच गई है। खेतों में मक्का के भुट्टों में दाना विकसित हो रहा है, लेकिन कुछ खेतों में इल्लियां भुट्टों को नुकसान पहुंचा रही हैं। इससे मक्का उत्पादक किसानों को भी फसल की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।
मक्का और सोयाबीन दोनों फसलों में इस समय किसान खेतों पर अधिक समय दे रहे हैं। फसल की स्थिति देखने के साथ कीटों की मौजूदगी पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार दवा का छिड़काव किया जा रहा है।
इन गांवों में खेती के काम में जुटे किसान-
सिरोल्या सहित आसपास के सुतारखेड़ा, कैलोद, बांगरदा, टिगरिया गोगा, हापाखेड़ा और भिलाखेड़ा सहित अन्य गांवों में इन दिनों खेतों में किसानों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। किसान सोयाबीन और मक्का की फसल की देखभाल में जुटे हुए हैं।
बारिश के बाद खेतों में फसलों की बढ़त अच्छी दिखाई दे रही है। अब किसानों की निगाहें फसल के अंतिम चरण पर हैं। सोयाबीन में अच्छी फलियां और उनमें पर्याप्त दाना भरने तथा मक्का के भुट्टों में दाना अच्छी तरह विकसित होने से किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद है। हालांकि कीट प्रकोप ने इस उम्मीद के बीच चिंता जरूर बढ़ा दी है।
किसानों का कहना है कि फसल की वर्तमान अवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में कीटों पर समय रहते नियंत्रण और खेतों की नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि तैयार हो रही फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
दो बार बोवनी के बाद भी नहीं उगी सोयाबीन! बीज पानी में हुआ खराब, किसानों पर तीसरी बोवनी का संकट



