मौसम ने ली महिलाओं के सब्र की परीक्षा, 2 घंटे की देरी से हुए चंद्रमा के दर्शन

बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। करवा चौथ पर इस बार मौसम ने सुहागिनों के धैर्य की कड़ी परीक्षा ले ली। शाम ढलते ही आसमान में घने बादल छा गए और चांद बादलों की ओट में छुप गया। आम दिनों में 8:30 बजे तक निकलने वाला चांद इस बार पूरे 2 घंटे की देरी से रात करीब 10:30 बजे नजर आया, तब जाकर कहीं महिलाओं ने व्रत खोला।
शाम 7 बजे से ही सोलह श्रृंगार कर सुहागिनें छतों पर थाली में दीया, करवा और छलनी लेकर चांद का इंतजार करने लगीं। लेकिन घंटे-दर-घंटे बीतते गए और चांद का कहीं पता नहीं चला। कई महिलाओं ने तो WhatsApp पर एक-दूसरे को मैसेज कर पूछा – “तुम्हारे यहां चांद निकला क्या?”
छतों पर गूंजी एक ही आवाज – चांद दिखा क्या
बेहरी मुख्यालय सहित रामपुर, गुवाड़ी, अंबापानी में जैसे ही रात 10:15 बजे बादलों के बीच से चांद की हल्की झलक दिखी, छतों पर खुशी की लहर दौड़ गई। महिलाओं ने छलनी से पहले चांद, फिर पति का चेहरा देखा, करवे से अर्घ्य दिया और पति के हाथ से पानी पीकर दिनभर का निर्जला व्रत तोड़ा।
व्रती सुनीता गोस्वामी, संगीता पाटीदार, माया पड़ेगा बताया कि सुबह 4 बजे सरगी से शुरू हुआ व्रत चांद न दिखने से काफी लंबा हो गया, लेकिन पति की लंबी उम्र के लिए यह इंतजार भी मीठा लगा।
पंडितजी बोले – शुभ है देरी से दर्शन
पूजा करा रहे पं. सुरेशचंद उपाध्याय व अंतिम उपाध्याय बताया कि बादल होने से चांद में देरी हुई, लेकिन शास्त्रों में देरी से चांद देखना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस व्रत से पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
देर रात तक गांव की छतों पर करवे से चांद को अर्घ्य देने और पति-पत्नी के एक-दूसरे को मिठाई खिलाने का दौर चलता रहा।




