Uncategorized

लोकगीत और लोकवाद्यों की कार्यशाला, सांस्कृतिक विरासत सहेजने पर जोर

लोकसंगीत के संरक्षण, पारंपरिक कलाओं के संवर्धन और नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास

Share

 

देवास। भारतीय लोक संस्कृति की समृद्ध परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से कलाव्योम फाउंडेशन द्वारा संस्कृति संचालनालय, मध्यप्रदेश के सहयोग से क्षिप्रा में लोकगीत एवं लोक वाद्य कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में लोकगीतों की सांस्कृतिक महत्ता, पारंपरिक गायन शैलियों, लोकवाद्यों की भूमिका तथा स्थानीय लोक कलाकारों के योगदान को रेखांकित किया गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोक कलाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत के पीढ़ीगत हस्तांतरण को प्रोत्साहित करना रहा।

लोकगीत भारतीय संस्कृति के जीवंत संवाहक-
कार्यशाला में लोक गायक दयाराम सारोलिया ने प्रतिभागियों को लोकगीतों की विशेषताओं, पारंपरिक गायन शैलियों, क्षेत्रीय लोकधुनों तथा हारमोनियम सहित विभिन्न लोकवाद्यों के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोकगीत हमारी सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक मूल्यों और परंपराओं के जीवंत संवाहक है।
कार्यशाला के दौरान करन पोरवाल ने तंबूरे तथा विजेंद्र ने ढोलक की विशेषताओं, वादन शैलियों और लोकसंगीत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका से प्रतिभागियों को परिचित कराया।

सारोलिया ने नई पीढ़ी को लोकसंगीत से जोड़ने तथा विलुप्तप्राय लोककलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कलाव्योम फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अपनी पुस्तकों का उल्लेख करते हुए लोकसाहित्य एवं पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण को सांस्कृतिक विरासत भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

लोककलाओं का संरक्षण समय की आवश्यकता-
कलाव्योम फाउंडेशन के अध्यक्ष अशोक श्रीमाल ने कहा कि लोकगीत एवं लोकवाद्य हमारी सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान के महत्वपूर्ण वाहक हैं। इनमें मिट्टी की सुगंध, स्थानीय समाज का जीवन-दर्शन तथा सदियों से संचित सांस्कृतिक अनुभव समाहित हैं। उन्होंने कहा कि कलाव्योम के माध्यम से लोककलाओं का संरक्षण एवं संवर्धन केवल प्राचीन परंपराओं को सहेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और पहचान को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण दायित्व भी है।

स्थानीय लोक कलाकार हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर के संवाहक-
कलाव्योम फाउंडेशन की सचिव अपर्णा भोसले ने कहा कि स्थानीय लोक कलाकार हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर के संवाहक हैं। कलाव्योम फाउंडेशन लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन तथा कलाकारों को सम्मान और प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि पारंपरिक ज्ञान, सांस्कृतिक मूल्यों और लोक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया जा सके।

कलाव्योम फाउंडेशन का संकल्प-
कलाव्योम फाउंडेशन कला एवं संस्कृति को केवल आयोजनों तक सीमित न रखते हुए प्रशिक्षण, कार्यशालाओं एवं दस्तावेजीकरण के माध्यम से लोक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है। संस्था विभिन्न कलाओं को प्रोत्साहित करने, पारंपरिक लोककलाओं का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करने, स्थानीय कलाकारों को मंच एवं पहचान प्रदान करने तथा युवाओं को लोक परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

Back to top button