खेत-खलियान

12 दिनों बाद हुई झमाझम बारिश से सोयाबीन फसल को फायदा, मुख्य मार्गों पर जलभराव से ग्रामीण परेशान

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सिरोल्या (अमर चौधरी)। सिरोल्या सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में सोमवार सुबह करीब 3:30 बजे गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू हुआ।

करीब 12 दिनों के अंतराल के बाद हुई बारिश से जहां किसानों के चेहरे खिल उठे, वहीं गांवों और प्रमुख मार्गों पर जलभराव की स्थिति बनने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश का सिलसिला सुबह से दोपहर करीब 12 बजे तक जारी रहा। इसके बाद भी मौसम में बादल छाए रहे और रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही। 

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अचानक हुई तेज बारिश से वातावरण में ठंडक घुल गई और लोगों को उमस से राहत मिली। सुबह के समय बारिश तेज होने के कारण प्रमुख मार्गों पर पानी बह निकला। निचले इलाकों में पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ी। सुतारखेड़ा मुख्य मार्ग पर गांव की आबादी वाले हिस्से में जलभराव होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क पर पानी जमा होने के कारण पैदल निकलने वाले लोगों के साथ ही दोपहिया वाहन चालकों को भी दिक्कत हुई।

इसी तरह देवास-डबलचौकी मुख्य मार्ग पर बांगरदा और कैलोद के हिस्सों में भी बारिश का पानी जमा हो गया। मार्ग पर जलभराव के चलते कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित रहा। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान निचले हिस्सों में पानी जमा होने की समस्या सामने आती है, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी होती है।

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सोयाबीन फसल के लिए राहत
करीब 12 दिनों के बाद हुई बारिश को खरीफ फसलों के लिए किसानों ने राहतभरा बताया है। इस समय खेतों में सोयाबीन की फसल में फूल आने का दौर चल रहा है। ऐसे समय में बारिश होने से फसल को पर्याप्त नमी मिलने की उम्मीद है। किसानों के अनुसार बारिश से सोयाबीन की फसल को फायदा होगा और खेतों में नमी बनी रहने से फसल की बढ़वार बेहतर हो सकती है।

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क्षेत्र में सोयाबीन के साथ मक्का सहित अन्य खरीफ फसलें भी खेतों में खड़ी हैं। हालांकि बारिश के दौरान कुछ स्थानों पर तेज हवा चलने से मक्का की खड़ी फसल आड़ी पड़ गई। इससे किसानों को नुकसान की आशंका है। किसानों का कहना है कि यदि हवा के कारण गिरी फसल अधिक प्रभावित हुई तो उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।

बारिश के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में मौसम सुहाना हो गया। लंबे अंतराल के बाद हुई बारिश ने जहां खरीफ फसलों को राहत दी, वहीं मुख्य मार्गों और आबादी वाले हिस्सों में जलभराव ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।

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