देवास

भरपूर बिजली के बावजूद बिल भरने में लापरवाही

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– सीनियर जोन में सुबह 6 बजे से कनेक्शन काटने लिए निकलती हैं टीमें, बिजली कंपनी कर रही सख्त कार्रवाई

देवास। शहर में बिजली विभाग के सीनियर जोन के कर्मचारी बिना रुके, बिना थके सुबह 6 बजे से रात तक अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। बिजली आपूर्ति में सुधार के बावजूद कई उपभोक्ता समय पर बिल चुकाने से कतरा रहे हैं। ऐसे में ‘बिजली लो, पैसा दो’ की नीति को सख्ती से लागू करते हुए बिजली कंपनी ने कड़े कदम उठाए हैं। सीनियर जोन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विभागीय टीमें हर दिन 40 से 50 कनेक्शन काट रही हैं, जिससे बकाया की वसूली में तेजी आई है। कर्मचारियों की यह मेहनत न सिर्फ शहर को बिजली संकट से दूर रखे हुए हैं, बल्कि लाखों रुपये का राजस्व भी वापस ला रही है।

देवास में चार जोन में बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी संभाल रही बिजली कंपनी की टीम पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ 24 घंटे काम कर रही है। सीनियर जोन, जिसे विवादित और संवेदनशील माना जाता है, वहां की स्थिति सबसे चुनौतीपूर्ण है। यहां विभाग ने दो टीमें गठित की हैं जो सुबह 6 बजे से बकायादार उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटने निकल पड़ती हैं। कर्मचारी सुबह जल्दी पहुंचते हैं ताकि टकराव और विवाद से बचा जा सके।

इस सख्ती का असर ये है कि हर दिन 4 से 5 लाख रुपये तक की बकाया वसूली हो रही है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि सुबह व्हीकल उपलब्ध होने और लोगों के सोए होने का समय सबसे उपयुक्त रहता है, जिससे टीम बिना किसी व्यवधान के काम निपटा लेती है।

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हमारी टीम मुस्तैदी से फील्ड में काम करती है-
सीनियर जोन प्रभारी प्रवीण जैन का कहना है, हमारा जोन बेहद सेंसेटिव है, कई उपभोक्ता विवाद की स्थिति भी पैदा कर देते हैं, लेकिन हमारी टीम पूरी मुस्तैदी से सुबह 6 बजे से फील्ड में निकल जाती है। उपभोक्ता उस समय सोए होते हैं, इसलिए हम जल्दी पहुंचकर कनेक्शन काटने की कार्रवाई करते हैं जिससे विवाद की संभावना कम रहती है।

उन्होंने बताया, कि हम उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति दे रहे हैं। ऐसे में समय पर बिजली बिल चुकाना उनकी जिम्मेदारी है। हम सभी उपभोक्ताओं से अनुरोध करते हैं कि वे बिजली बिल समय पर जमा करें, ताकि विभाग को सख्त कदम न उठाने पड़ें और बिजली व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे। समय पर भुगतान से कर्मचारियों को बार-बार कनेक्शन काटने जैसी कठिन कार्रवाई नहीं करनी पड़ती।

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