स्मार्टफोन खरीदना हुआ महंगा, AI की बढ़ती मांग से RAM-स्टोरेज की कीमतों पर दबाव
फोन खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

बजट मोबाइल खरीदने वालों की बढ़ी मुश्किलें, महंगे पुर्जों का भी असर
नई दिल्ली। स्मार्टफोन अब केवल बातचीत का साधन नहीं, बल्कि पढ़ाई, ऑनलाइन भुगतान, बैंकिंग, कारोबार और रोजमर्रा के कई जरूरी कामों का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में मोबाइल फोन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों के बजट पर पड़ता है।
वर्ष 2026 में भारत में स्मार्टफोन की औसत कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके पीछे RAM और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग और डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी जैसे कारण सामने आए हैं।
बाजार अनुसंधान संस्था काउंटरपॉइंट रिसर्च (Counterpoint Research) की 29 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2026 की पहली छमाही में स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 16 प्रतिशत बढ़ी। रिपोर्ट में 10 हजार रुपए से कम कीमत वाले फोन के सेगमेंट में औसत कीमत वृद्धि लगभग 32 प्रतिशत बताई गई। हालांकि, यह पूरे बाजार का औसत है और हर कंपनी या मॉडल की कीमत में समान वृद्धि नहीं हुई है।
AI की बढ़ती मांग से मोबाइल की मेमोरी महंगी-
स्मार्टफोन की कीमतों में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण मेमोरी चिप की लागत में तेजी आना है। मोबाइल में इस्तेमाल होने वाली RAM फोन को एक साथ कई ऐप चलाने में मदद करती है, जबकि स्टोरेज में फोटो, वीडियो, ऐप और अन्य फाइलें सुरक्षित रहती हैं।
दूसरी ओर, AI तकनीक के विस्तार के साथ दुनिया भर में बड़े डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं। इन केंद्रों को भी बड़ी मात्रा में मेमोरी चिप की जरूरत होती है। चिप निर्माता कंपनियां AI से जुड़े अधिक उन्नत और लाभकारी उत्पादों के उत्पादन पर क्षमता लगा रही हैं। इससे सामान्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी की आपूर्ति और लागत पर दबाव बढ़ा है।
इसका असर मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है। जब फोन के प्रमुख पुर्जे महंगे होते हैं, तो कंपनियों को उत्पादन लागत और अपने मुनाफे के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। कई कंपनियां बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, जिससे बाजार में फोन की कीमतें बढ़ जाती हैं।
रुपये की कमजोरी से भी बढ़ती है लागत-
भारत में मोबाइल फोन की असेंबलिंग बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता बनी हुई है। इनमें मेमोरी, प्रोसेसर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक घटक शामिल हैं।
ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने पर विदेशों से खरीदे जाने वाले पुर्जों की लागत बढ़ती है। आयात और अन्य खर्चों में वृद्धि होने पर कंपनियों के लिए पुरानी कीमतों पर फोन बेचना मुश्किल हो जाता है।
हालांकि, किसी फोन की अंतिम कीमत केवल रुपए की स्थिति या एक पुर्जे से तय नहीं होती। कंपनी की उत्पादन रणनीति, मॉडल की श्रेणी, कर, वितरण लागत, बाजार में प्रतिस्पर्धा और उपलब्ध छूट भी कीमत को प्रभावित करती हैं।
सबसे ज्यादा दबाव बजट फोन पर क्यों?
कम कीमत वाले स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहक आम तौर पर सीमित बजट में बेहतर RAM, ज्यादा स्टोरेज, अच्छी बैटरी और अच्छा कैमरा चाहते हैं। लेकिन जब मेमोरी चिप महंगी होती है, तो बजट फोन बनाने की लागत पर अपेक्षाकृत ज्यादा असर पड़ सकता है।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में 10 हजार रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की औसत कीमत में लगभग 32 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में इस श्रेणी में फोन की शिपमेंट पिछले वर्ष की तुलना में 65 प्रतिशत घटी।
यहां शिपमेंट का अर्थ कंपनियों द्वारा बाजार और बिक्री चैनलों तक भेजे गए फोन से है, न कि सीधे ग्राहकों द्वारा खरीदे गए फोन से। फिर भी आंकड़े संकेत देते हैं कि बढ़ती कीमतों के बीच कम बजट वाले बाजार पर अधिक दबाव पड़ा है।
इस स्थिति में ग्राहकों को पुराने मॉडल, कम स्टोरेज वाले विकल्प या अपनी जरूरत के अनुसार दूसरे फोन पर विचार करना पड़ सकता है। वहीं, कंपनियां भी लागत नियंत्रित रखने के लिए अलग-अलग मॉडल में फीचर्स और कीमत का संयोजन बदल सकती हैं।
क्या आगे भी बढ़ेंगी स्मार्टफोन की कीमतें?
इस सवाल का निश्चित जवाब देना अभी संभव नहीं है। आने वाले महीनों में फोन की कीमतें मेमोरी चिप की आपूर्ति, उसकी वैश्विक कीमत, रुपये की विनिमय दर और कंपनियों की व्यावसायिक रणनीति पर निर्भर करेंगी।
काउंटरपॉइंट रिसर्च की सितंबर 2026 की रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि मेमोरी की लागत का दबाव जल्द खत्म होने की संभावना कम है। अक्टूबर में जारी संस्था के मेमोरी बाजार संबंधी आकलन में भी चौथी तिमाही के दौरान विभिन्न श्रेणियों की मेमोरी कीमतों पर दबाव बने रहने की बात कही गई।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मोबाइल की कीमत लगातार बढ़ेगी। कुछ मॉडलों पर त्योहारों के दौरान छूट मिल सकती है, पुराने मॉडल सस्ते हो सकते हैं या कंपनियां विशेष ऑफर पेश कर सकती हैं। इसलिए बाजार की सामान्य प्रवृत्ति और किसी खास फोन की वास्तविक बिक्री कीमत में अंतर समझना जरूरी है।
फोन खरीदने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
1. केवल कीमत नहीं, जरूरत देखें: फोन मुख्य रूप से कॉल, मैसेज, ऑनलाइन भुगतान और सामान्य उपयोग के लिए चाहिए तो महंगे फ्लैगशिप मॉडल पर खर्च करना जरूरी नहीं है।
2. RAM और स्टोरेज का संतुलन चुनें: ज्यादा RAM या स्टोरेज तभी उपयोगी है, जब आपकी जरूरत उससे पूरी होती हो। कैमरा, प्रोसेसर, बैटरी और सॉफ्टवेयर अपडेट को भी महत्व दें।
3. पुराने मॉडल की कीमत जांचें: नया फोन लॉन्च होने के बाद पिछले मॉडल पर छूट मिल सकती है। लेकिन खरीदने से पहले अपडेट सपोर्ट, वारंटी और बैटरी की स्थिति देख लें।
4. ऑफर की वास्तविक बचत समझें: ऑनलाइन छूट, बैंक ऑफर और एक्सचेंज बोनस के बाद मिलने वाली अंतिम कीमत की तुलना अलग-अलग विक्रेताओं से करें। केवल बड़ी छूट के विज्ञापन को देखकर फैसला न लें।
5. जरूरत न हो तो जल्दबाजी न करें: यदि मौजूदा फोन ठीक चल रहा है, तो केवल कीमत बढ़ने की आशंका में तुरंत नया फोन खरीदना जरूरी नहीं है। दूसरी ओर, कीमतें निश्चित रूप से घटेंगी, यह मानकर खरीदारी टालना भी सही नहीं होगा।
आम ग्राहकों के लिए क्या है संकेत?
स्मार्टफोन बाजार में मौजूदा बदलाव बताते हैं कि मोबाइल की कीमत तय करने में अब केवल कैमरा, डिजाइन और प्रोसेसर ही नहीं, बल्कि वैश्विक मेमोरी बाजार और AI उद्योग की मांग भी अहम भूमिका निभा रही है। इसका असर खासतौर पर उन लोगों पर पड़ता है जो सीमित बजट में नया फोन खरीदना चाहते हैं।
फिलहाल ग्राहकों के लिए सबसे व्यावहारिक तरीका है कि वे अपनी जरूरत तय करें, अलग-अलग मॉडलों की वास्तविक कीमत की तुलना करें और फोन की उपयोगिता के हिसाब से खरीदारी करें। बाजार में कीमतों का अगला रुख मेमोरी की उपलब्धता और उत्पादन लागत में होने वाले बदलावों से तय होगा।
स्रोत: स्मार्टफोन कीमतों और बाजार के आंकड़ों के लिए Counterpoint Research की 29 सितंबर 2026 की रिपोर्ट तथा अक्टूबर 2026 का मेमोरी बाजार आकलन।



