एसआईआर को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा जिलाध्यक्ष ने उठाए सवाल
कहा- चुनाव आयोग की स्पष्ट स्थिति के बाद भ्रम फैलाना उचित नहीं

देवास। कांग्रेस एवं राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बीच चुनाव आयोग द्वारा 26 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष डाक्टर रायसिंह सेंधव ने कांग्रेस से तथ्यों के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद कहा कि एसआईआर से संबंधित निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। साथ ही एफओआरएम -6 से जुड़े एसआईआर घोषणा-पत्र को लेकर भी आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है।
भाजपा जिला अध्यक्ष डाॅ. सेंधव ने कहा कि पिछले कुछ समय से कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग, एसआईआर और मतदाता सूची को लेकर लगातार गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों के माध्यम से संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के मन में भ्रम एवं अविश्वास पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब चुनाव आयोग ने स्वयं पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, ऐसे में कांग्रेस को भी तथ्यों के आधार पर देश के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग की बैठक में एसआईआर से जुड़े निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए जाने की बात आयोग ने स्पष्ट की है। आयोग ने यह भी कहा है कि एसआईआर के दौरान जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनके दस्तावेज बीएलओ द्वारा उनके घर जाकर भी एकत्र किए जा सकते हैं तथा एफओआरएम -6 से जुड़ा घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया है। ECINet की सुरक्षा एवं नियमों के अनुपालन की जांच के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल करते हुए समिति गठित करने की जानकारी भी आयोग ने दी है।
एफओआरएम -6 को लेकर भी स्थिति स्पष्ट
डाॅ. सेंधव ने कहा कि एफओआरएम -6 से जुड़े घोषणा-पत्र को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। चुनाव आयोग के अनुसार एसआईआर से संबंधित एफओआरएम -6 का घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया है। इसलिए इस विषय को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को तथ्यों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी संवैधानिक संस्था के निर्णय से असहमति व्यक्त करने का अधिकार राजनीतिक दलों को है, लेकिन असहमति और संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने के प्रयास में अंतर होना चाहिए। राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे जनता के सामने तथ्य रखें और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएं।
मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आरोपों पर भी सवाल
भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि किसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पूरी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि जब चुनाव आयोग ने अपने निर्णय और प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण दे दिया है, तो क्या कांग्रेस पहले लगाए गए आरोपों पर पुनर्विचार करेंगी?
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव जीतने का आधार जनता के बीच जाकर सेवा, कार्य और नीतियों के आधार पर जनसमर्थन हासिल करना है। चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर बिना पर्याप्त तथ्यों के आरोप लगाने से जनता के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
कांग्रेस से भाजपा जिलाध्यक्ष के सवाल
डाॅ. सेंधव ने कांग्रेस और राहुल गांधी से सवाल करते हुए कहा कि जब चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर से जुड़े निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं, तो वे अपने आरोपों पर कायम क्यों हैं? उन्होंने यह भी पूछा कि एफओआरएम -6 से जुड़े घोषणा-पत्र पर सुप्रीम कोर्ट की स्थिति सामने आने के बाद कांग्रेस की क्या राय है और क्या वह देश के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी? उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को अपनी ओर से स्थिति स्पष्ट कर दी है। ऐसे में अब राजनीतिक दलों को तथ्यों के साथ जनता के बीच जाना चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। उक्त जानकारी भाजपा जिला मीडिया प्रभारी कमल अहिरवार ने दी।
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