कर्मफल से कोई व्यक्ति नहीं बच सकता, अच्छे कर्म ही जीवन की सच्ची पूंजी- महंत स्वामी रामनारायण जी

रामद्वारा में उल्लासपूर्वक मनाया कृष्ण जन्मोत्सव, भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण
देवास। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर रामद्वारा में श्रद्धा और उल्लास का वातावरण रहा।
जन्माष्टमी पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में महंत स्वामी रामनारायणजी ने श्रद्धालुओं को कर्म और उसके फल का महत्व बताते हुए कहा कि कर्मफल से कोई व्यक्ति नहीं बच सकता। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए और ईश्वर के चरणों में ध्यान लगाकर अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
महंत स्वामी रामनारायण जी ने कहा कि व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। अच्छे कर्म जीवन में सुख और संतोष का मार्ग प्रशस्त करते हैं, जबकि गलत कर्मों का परिणाम भी व्यक्ति को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता के माध्यम से मानव जीवन को कर्म, धर्म और मोक्ष का मार्ग दिखाया है।

उन्होंने कहा कि भगवद्गीता का संदेश किसी एक वर्ग या युग तक सीमित नहीं है, बल्कि हर मानव के लिए प्रासंगिक है। दुनिया में जब भी आध्यात्मिक चर्चा होती है, तब तक वह पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक उसमें भगवद्गीता के संदेश का उल्लेख न हो। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में जीवन की परिस्थितियों के अनुरूप प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्म करते हुए मोक्ष की ओर बढ़ने का मार्ग बताया है।
इस अवसर पर संत राम सुमिरन जी एवं बाल संत पुनीत राम जी के सान्निध्य में रामद्वारा सत्संग मंडल द्वारा सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी गई। भजनों के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव में झूमते नजर आए और पूरा रामद्वारा परिसर जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा।
रामद्वारा में चातुर्मास सत्संग के अंतर्गत विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन भी किए जा रहे हैं। कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं को ‘जय श्री कृष्ण’ लिखे दुपट्टे वितरित किए गए, जिससे आयोजन का उत्साह और बढ़ गया।




