नौ दिनों तक अन्न-जल का त्याग कर शरीर पर उगाए ज्वारे


- देवी मां की प्रसन्नता के लिए की कठिन तपस्या, दर्शन व पूजन के लिए उमड़े श्रद्धालु
पुंजापुरा (बाबू हनवाल)। नवरात्रि में नौ दिनों तक भक्तों ने मां को प्रसन्न करने के लिए कई तरह से कठिन व्रत किए। इसी प्रकार की कठिन तपस्या सिवनी की उपासना ने की। उन्होंने नौ दिनों तक जमीन पर लेटे हुए अपने शरीर पर ज्वारे उगाए। पिछले नौ सालों से वे नवरात्रि में यह कठिन व्रत कर रही हैं। इस दौरान अन्न-जल का भी त्याग किया।
वे सिवनी की रहने वाली हैं। इस बार पुंजापुरा के समीप बोरखाल्या के मजरा टोला लालघाटी में भजीव के निवास स्थान पर आई थीं। माताजी के लिए घर में पूर्ण व्यवस्था की गई। उनके शरीर पर कपड़ा रखा और मिट्टी लगाकर ज्वारे उगाए गए। उसके ऊपर दीप प्रज्वलित किया गया। शरीर के चारों ओर नीबू की माला लगाई गई। बिछुड़ी, अंगूठी, हाथों में चूड़ी, माथे पर टिकी, आंखों में काजल लगाया गया। सोलह प्रकार के आभूषणों से श्रृंगार किया गया।

इस दौरान उन्होंने अन्न-जल का त्याग किया। उनकी प्रतिज्ञा अनुसार ज्वारों पर नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलती रही। उनके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आगमन होता रहा। श्रद्धालुओं ने प्रतिदिन गरबा भी किया। नवमी पर नगर भ्रमण कराया गया। जगह-जगह ग्रामीणों ने पूजन-अर्चन किया। विसर्जन समारोह में नौ बालिकाएं सिर पर ज्वारे रखकर शामिल हुई। समीप की नदी में विसर्जन किया गया। परिजनों ने बताया कि उपासना सिवनी की रहने वाली हैं। वे इंदौर से वापस जाने वाली थी, लेकिन समय अधिक हो गया तो बोरखाल्या में अपने परिचित के यहां रूककर उन्होंने यह कठिन व्रत किया। उनकी नियमित रूप से पूजा पुजारी श्री पर्ते ने की। इधर क्षेत्र में नवमी पर सुबह से शाम तक हवन-पूजन के साथ भंडारा हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया।




